🔘 IPC 1860 NOTES

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📗 अध्याय 1 : प्रस्तावना + अध्याय 2 : साधारण स्पष्टीकरण

SEC 01 TO 21


भारतीय दण्ड संहिता, 1860, 1 जनवरी, 1862 को प्रभावी हुआ। इस संहिता का अधिनियम संख्या 45 सन् 1860 है। इस संहिता का प्रवर्तन  सम्पूर्ण भारत पर हैं। इस संहिता को तत्कालीन गवर्नर जनरल की अनुमति 6 अक्टूबर 1860 को प्राप्त हुई। गोवा, दमन तथा दीव में इसका प्रवर्तन 1 जनवरी, 1963 को हुआ।

👉 नोट– 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू कश्मीर में भी भारतीय दण्ड संहिता लागू हो गयी है।

Question 1. अपराध की अवस्थाएं कितनी और कौन – कौनसी होती है ?

◼️अपराध की चार अवस्थाएं होती है , यथाः –

◾आशय ,
◾तैयारी ,
◾प्रयत्न
◾एवम् कारित होना अर्थात् अपराध की पूर्णता होना ।

Question 2. कौन-सी धाराएँ क्षेत्रातीत प्रवर्तन का
प्रावधान भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में करती हैं ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 3 और 4 संहिता के क्षेत्रातीत प्रवर्तन (Extra-territorial enforcement) का प्रावधान करती है।

◼️ धारा 3 के अनुसार, भारत से परे किए गए अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति भारतीय विधि के अनुसार, विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए इस संहिता के उपबंधों के अनुसार ऐसा बरता जायेगा, मानों वह कार्य भारत के भीतर किया गया था। धारा 4 में उपबंधित है कि इस संहिता के उपबंध-

1. भारत से बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा, या

2. भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा किए गये किसी अपराध भी लागू होता है।

3. भारत से बाहर और परे किसी स्थान में किसी व्यक्ति द्वारा जो भारत में किसी कम्प्यूटर साधन को लक्ष्य बाते हुए अपराध कारित करता है।

Question 3. ‘ क ‘ नामक विदेशी व्यक्ति समुद्र में तैर रही एक समुद्री जलपोत में एक विवाहित स्त्री के साथ जारकर्म करता हैं । जब ‘ क ‘ मद्रास उतरता है तो उसको मद्रास की दाण्डिक न्यायालय में अभियोजित किया जाता है । क्या उसे उस न्यायालय द्वारा दाण्डिक किया जा सकता है ?

◾चूंकि प्रश्नगत जलपोत भारत में पंजीकृत नहीं था ,

◾अतः ‘ क ‘ नामक विदेशी को भारतीय न्यायालय द्वारा दण्डित नहीं किया जा सकता है ।

धारा 4 ]

Question 4. भारतीय दण्ड संहिता का कौन – कौनसी विधियों पर प्रभाव नहीं पड़ सकता है ?

◼️ जब विद्रोह एवम् अभित्यजन के लिये

◾भारत सरकार की सेवा के आफिसरों ,
◾सैनिकों ,
◾नौसैनिकों
◾और वायु सैनिकों को दण्डित करना हो ,

👉 उससे सम्बन्धित विधि के और विशेष या स्थानीय विधियों के मामले हों ।

धारा 5 ]

Question 5. भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 10 में ‘पुरुष’, ‘स्त्री’ शब्द की परिभाषा दी गई है।

◼️ उपरोक्त धारा के अनुसार-

पुरुष‘ शब्द किसी भी आयु के मानव नर का द्योतक है।

स्त्री‘ शब्द किसी भी आयु की मानव नारी का द्योतक है।

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार ” व्यक्ति ” को परिभाषित कीजिये ।

◼️” व्यक्ति ” के अन्तर्गत

◾कोई कम्पनी ,
◾संघ अथवा व्यक्तियों के निकाय ( चाहे निगमित हो या नहीं ) आते है ।

धारा 11 ]

Question 7. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 13 में ‘क्वीन की परिभाषा निरसित की गई थी ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 13 में परिभाषित ‘क्वीन’ शब्द को विधि अनुकूलन आदेश 1950 द्वारा निरासित कर दिया गया।

Question 8. सरकार का सेवक ( Servant of Government ) का क्या तात्पर्य हैं ?

◾सरकार के प्राधिकार के द्वारा या अधीन ,
◾भारत के भीतर उस रूप में नियुक्त या नियोजित अधिकारी अथवा सेवक ।

धारा 14 ]

Question 9. ” न्यायाधीश की भारतीय दण्ड संहिता के अधीन , क्या परिभाषा है ?

◾’ न्यायाधीश ” का तात्पर्य पदरूप से अभिहित न्यायाधीश
◾एवम् विधि द्वारा सशक्त हर व्यक्ति जिसका निर्णय किसी भी प्रकार की विधिक कार्यवाही में अंतिम निर्णय हो ।

धारा 19 |

Question 10. ” न्यायालय ” ( Court of Justice ) की क्या परिभाषा है ?

◾ न्यायाधीश , जिसे अकेले ही अथवा न्यायाधीशों का निकाय ,
◾जिसे न्यायिकत : कार्य करने हेतु विधि द्वारा सशक्त किया गया हो ।

धारा 20 ]

Question 11. भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत क्या ग्राम पंचायत में सेवारत कर्मचारीगण लोक सेवक ‘ की परिधि में आते है ?

◾ग्राम पंचायत एक स्थानीय प्राधिकारी होने के कारण , ◾उसके सेवारत कर्मचारीगण ‘ लोक सेवक ‘ की परिधि में आते है ।

Question 12. क्या मजिस्ट्रेट और न्यायाधीश ‘ लोक सेवक ‘ की परिधि में आ जाते हैं ?

◼️ जी हां । [ धारा 21 ]

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 21 में लोक सेवक को परिभाषित किया गया है निम्नलिखित को लोक सेवक माना गया है-

(1) भारत की सेना, नौ सेना या वायुसेना का हर आयुक्त आफिसर

(2) हर न्यायाधीश

(3) न्यायालय का हर आफिसर

(4) किसी न्यायालय या लोक सेवक की सहायता करने वाला हर जूरी सदस्य कर निर्धारक या पंचायत का सदस्य

(5) हर मध्यस्थ

(6) हर व्यक्ति जो किसी ऐसे पद को धारण करता हो, जिसके आधार से वह किसी व्यक्ति को परिरोध में करने या रखने के लिए सशक्त हो ।

(7) सरकार का हर आफिसर जिसका ऐसे आफिसर के नाते यह कर्त्तव्य हो कि वह अपराधों का निवारण करें।

(8) हर आफिसर जिसका ऐसे आफिसर के नाते यह कर्त्तव्य हो कि वह सरकार की ओर से किसी सम्पत्ति को ग्रहण करें, प्राप्त करें, रखें या व्यय करें या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण निर्धारण या संविदा करें।

(9) हर आफिसर जिसका ऐसे आफिसर के नाते यह कर्त्तव्य है कि वह किसी ग्राम, नगर या जिले के किसी प्रयोजन के लिये। किसी सम्पत्ति को ग्रहण करें।

(10) हर ऐसा व्यक्ति जो कोई ऐसा पद धारण करता हो जिसके आधार से वह निर्वाचक नामावली तैयार करता है।

(11) हर व्यक्ति जो सरकार सेवा या वेतन में हो।

Question 13. आपराधिक विधि की सुविदित उक्ति- ऐक्टस नान फैसिट निसी मीन्स सिट रिया ( Actus non facit reum nisi mens sit rea ) का क्या अर्थ है ?

◼️ कार्य स्वयं किसी को दोषी नहीं बनाता जब तक उसका आशय वैसा न रहा हो ।◼️◼️ अध्याय 2 : साधारण स्पष्टीकरण

SEC 22 TO 52 A

Question 1. ” सदोष लाभ ” और ” सदोष हानि ” से क्या अभिप्राय हैं ?

◾विधि विरुद्ध साधनों द्वारा सम्पत्ति का लाभ ” सदोष लाभ “
◾ एवम् विधि विरूद्ध साधनों द्वारा विधिक हकदार व्यक्ति की सम्पत्ति को हानि पहुंचाना ” सदोष हानि ” कहलाता है ।

धारा 23 ]

Question 2. ‘ बेईमानी से को परिभाषित कीजिये ।

◾ जो कोई इस आशय से कार्य करता है कि एक व्यक्ति को सदोष अभिलाभ
◾ या अन्य व्यक्ति को सदोष हानि कारित करें , उस कार्य को बेईमानी से करना कहा जाता है ।

धारा 24 ]

Question 3. ” कूटकरण ” से आप क्या समझते हैं ?

◾ जो व्यक्ति एक वस्तु को दूसरी वस्तु के सदृश्य इस आशय से करता है कि वह उस सदृश्य से प्रवंचना करे ,
◾या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि तद्द्वारा प्रर्वचना की जायेगी , वह ” कूटकरण ” करता है , यह कहा जाता है ।

👉 उल्लेखनीय है कि कूटकरण के लिये यह आवश्यक नहीं है कि नकल ठीक वैसी ही हो ।

👉 जबकि कोई व्यक्ति एक वस्तु को दूसरी वस्तु के सदृश्य करदे और सादृश ऐसा है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को प्रवंचना हो सकती हो ,

( तो जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न किया जाये ,)

👉 यह उपधारणा की जायेगी कि जो व्यक्ति एक वस्तु को दूसरी वस्तु के इस प्रकार सदृश बनाता है उसका आशय उस सादृश्य द्वारा प्रवंचना करने का था या वह यह सम्भाव्य जानता था कि एतद्द्वारा प्रवंचना जायेगी ।

धारा 28 ]

Question 4. ‘ इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की क्या परिभाषा है ?

◼️ ‘ इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड ‘ सूचना तकनीकी अधिनियम 2000 की धारा 2 ( 1 ) ( न ) के लिये निर्दिष्ट अर्थ रखेगा ।

धारा 29 – क ]

Question 5. ‘ मूल्यवान प्रतिभूति क्या होती है ?

◼️ ऐसा दस्तावेज अभिप्रेत है जिसके द्वारा

◾कोई विधिक अधिकार अन्तरित , निर्बन्धित निर्वापित किया जाये अथवा छोड़ा जाये ।

धारा 30 ]

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के अंतर्गत ‘संयुक्त आपराधिक दायित्व’ (Joint criminal liability) का सिद्धांत क्या है ?

◼️ धारा 34 के अनुसार, जब कि कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा अपने सब के सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है, तब ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व के अधीन है, मानो वह कार्य अकेले उसी ने किया हो।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 सामान्य आशय के अग्रसर में कई व्यक्तियों द्वारा किये गये कार्य को अपराध का दायित्व निर्धारित करती है। धारा 34 सिर्फ एक साक्ष्य का नियम है।

👉 धारा 34 कोई सारभूत अपराध घोषित नहीं करता है।
👉 धारा 34 के अधीन दायित्व का निर्धारण करने के लिए कम से कम दो व्यक्तियों के द्वारा सामान्य आशय के अग्रसर में कोई कार्य किया गया होना चाहिए।

◼️ ‘क’ और ‘ख’, ‘ग’ की हत्या करने जाते हैं। ‘क’, हाथ में भाला लेकर रक्षा हेतु खड़ा रहा लेकिन उसने ‘ग’ को नहीं मारा। ‘ख’, ने ‘ग’ को मार डाला। इस मामले में ‘क’ और ‘ख’, दोनों ‘ग’ की हत्या के लिए उत्तरदायी है

चूंकि ‘क’ एवं ‘ख’ का सामान्य आशय ‘ग’ की हत्या करना था, अतः वे दोनों हत्या के लिए दोषी हैं।

◼️ वारीन्द्र कुमार घोष बनाम एम्परर के वाद में प्रिवी कौंसिल ने कहा कि अपराध में वह भी कार्यरत है जो मात्र खड़े रहते हैं और प्रतिक्षा करते हैं।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 34 में परिभाषित ‘सामान्य आशय’ से अभिप्राय एक ही आशय के प्रति दो या दो से अधिक व्यक्तियों में मानसिक सहमति (पूर्व व्यवस्थित योजना) का होना तथा एक दूसरे की उसमें सहभागिता । महबूब शाह बनाम एम्परर के वाद में प्रिवी कौंसिल ने अभिनिर्णीत किया कि ‘सामान्य आशय’ में आपराधिक योजना में शामिल सभी व्यक्तियों के ‘मस्तिष्कों का पूर्वमिलन’ आवश्यक है

Question 7. भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार , ” स्वेच्छया ” से क्या तात्पर्य है ?

◼️ किसी व्यक्ति द्वारा किसी परिणाम को ” स्वेच्छया कारित करना तब कहा जाता है ।

◾जब वह उसे उन साधनों द्वारा कारित करता है , जिनके द्वारा कारित करने सम्भाव्यता का ज्ञान हो । 

धारा 39 ]

Question 8. शब्द  ” अवैध ” को परिभाषित कीजिये ।

◼️ वह प्रत्येक बात जो अपराध हो या विधि द्वारा प्रतिषिद्ध हो या दीवानी कार्यवाही करने के लिये आधार उत्पन्न करता हो ।

धारा 43 ]

Question 9. ” क्षति ” से क्या अभिप्रेत है ?

◼️ किसी व्यक्ति के शरीर , मन , ख्याति अथवा सम्पत्ति को अवैध रूप से कारित की गई अपहानि को क्षति ( injury ) कहते है ।

धारा 44 ]

Question 10. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 52-A संश्रय को परिभाषित करें ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 52A में “संश्रय” को परिभाषित किया गया है तथा धारा 212 में अपराधी को संश्रय देने के लिए दण्ड का प्रावधान है,

◼️ जिसके अनुसार धारा 157 में के सिवाय और धारा 130 में वहाँ के सिवाय जहाँ कि संश्रय व्यक्ति की पत्नी या पति द्वारा दिया गया हो, संश्रय शब्द के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को आश्रय, भोजन, पेय, धन वस्त्र आयुध गोला बारुद या प्रवहण के साधन देना या किन्ही साधनों से चाहे वह उसी प्रकार के हो या नहीं किसी व्यक्ति की सहायता पकड़े जाने से बचने के लिए किया जाता है।

◼️◼️अध्याय 3 : दण्डों के विषय में
SEC 53 TO 75

Question 1. भारतीय दण्ड संहिता में कितने प्रकार के दण्डों का प्रावधान है ?

◼️संहिता की धारा 53 में वर्तमान में 5 प्रकार के दण्डों का प्रावधान है जो निम्न है –

( i )  मृत्यु
( ii ) आजीवन कारावास या
( iii ) कारावास ( कठिन / साधारण )
( iv ) सम्पत्ति का समपहरण
( v ) जुर्माना

Question 2. आजीवन कारावास की सजा का क्या अर्थ है ?

अभियुक्त के सम्पूर्ण अवशिष्ट जीवन के लिए सजा जब तक कि सजा में पूर्णतः या आंशिक रूप में समुचित सरकार द्वारा छूट नहीं दे दी जाती ।

👉 आजीवन कारावास की सजा 20 वर्ष की अवधि बीतने पर स्वतः समाप्त नहीं हो जाती ।

Question 3. समुचित सरकार को आजीवन कारावास के दण्डादेश के लघुकरण के बारे में क्या विधिक अधिकार प्राप्त हैं ?

◾अपराधी की सहमति के बिना समुचित सरकार

आजीवन कारावास को 14 वर्ष से अनधिक अवधि के कारावास में परिवर्तित कर सकती है ।

Question 4. कोई मजिस्ट्रेट चोरी के अपराध से आरोपित अभियुक्त को एक वर्ष कारावास तथा एक हजार के जुर्माने से दोषसिद्ध करता है। जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास से दण्डादिष्ट किये जा सकने वाले अभियुक्त के लिए अधिकतम दण्ड होगा:-

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1880 की धारा 65 के अनुसार, जब मजिस्ट्रेट द्वारा कारावास के साथ जुर्माना दिया जाता है, तब मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को जिस अपराध के लिए विचारण कर रहा है।

👉 उसके अधिकतम दण्ड के (1/4) एक चौथाई अवधि का कारावास दे सकता है।

👉 चोरी के लिए तीन वर्ष के कारावास का उपबन्ध है। अतः जुर्माना भुगतान में व्यतिक्रम की दशा में अधिकतम 9 माह का अतिरिक्त कारावास का दण्डादेश दिया जा सकता है।

Question 5. एक्स को 200 रु. के जुर्माने से दण्डित किया जाता है। तथा जुर्माना अदा न करने पर उसे चार माह के कारावास के दण्ड से दण्डित किया जाता है। एक्स जुर्माना अदा नहीं करता है और चार माह के कारावास में चला जाता है, लेकिन कारावास के 2 माह पूर्ण करने पर वह 150 रु. अदा कर देता है। ऐसी स्थिति में क्या एक्स को तुरन्त उन्मुक्त कर देना चाहिये ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भा.दं.सं., 1860 की धारा 67 तथा धारा 69 पर आधारित है। प्रस्तुत समस्या में एक्स को तुरन्त उन्मुक्त कर देना चाहिये।

◼️ धारा 67 के अनुसार यदि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो तो न्यायालय निम्नलिखित मापमान में सादा कारावास से अपराधी को कारावासित करने का निदेश दे सकेगा-

👉 जब जुर्माना की रकम 50 रु. तक हो तब दो माह
👉 जब जुर्माना की रकम 100 रु. तक हो चार मास
👉अन्य रकम की दशा में – छह मास तक कारावास की सजा जुर्माने के अभुगतान के लिए हो सकेगी।

Question 6. किस अवधि के भीतर जुर्माने की राशि उद्गृहणीय ( leviable ) हैं ?

◾ दण्डादेश दिये जाने के पश्चात् छः वर्ष की अवधि में

◾या कारावास की अवधि के समाप्ति ( expiration ) से पूर्व उद्गृहणीय ।

धारा 70 ]

Question 7. एकान्त परिरोध ( solitary confinement ) क्या है एवं इसकी सीमाएं स्पष्ट करें

धारा 73 उन मानकों को निर्धारित करती है जिसके अनुसार एकान्त परिरोध आरोपित किया जा सकता है ।

◾यह धारा यह भी निर्धारित करती है कि एकान्त परिरोध कितने समय तक अस्तित्व में रहेगा ।

👉 यदि कारावास 6 माह का है तो अधिकतम 1 माह तक ,
👉 यदि कारावास 6 माह से अधिक व 1 वर्ष तक का है तो 2 माह तक
👉 और कारावास 1 वर्ष से अधिक की अवधि का है तो तीन माह तक का ही एकान्त परिरोध हो सकेगा ।

धारा 74 दण्ड के निष्पादन में एकान्त परिरोध की सीमा को निर्धारित करती है ,

👉 जिसके अनुसार यह एक बार में 14 दिन से अधिक का नहीं होगा ।

Question 8. पहले से दोषसिद्ध किसी अपराधी को बढ़ी हुई सजा देने के लिए कौन-सी शर्त आवश्यक है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 75 के अनुसार जो कोई व्यक्ति भारत में किसी न्यायालय के द्वारा इस संहिता के अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन 3 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए दोनों में से किसी भांति के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि ठहराये जाने के पश्चात्

◼️ उन दोनों अध्यायों में से किसी अध्याय के अधीन उतनी ही अवधि के लिए वैसे ही कारावास से दण्डनीय किसी अपराध का दोषी हो तो

👉 वह हर ऐसे पश्चात्वर्ती अपराध के लिए आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी दण्डनीय होगा।

◼️◼️अध्याय 4 : साधारण अपवाद
SEC 76 TO 95

Question 1. ” विधि की अनभिज्ञता कोई प्रतिहेतु नहीं है ” का सूत्र भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में समावेश है ?

◼️ धारा 76
◼️ विधि की अनभिज्ञता कोई प्रतिहेतु नहीं है” इस सूत्र का समावेश भारतीय दण्ड संहिता की धारा 76 में किया गया है।

👉 विधि की भूल का अर्थ है किसी विशिष्ट विषय पर किसी विधि के अस्तित्ववान होने या अन्यथा के विषय में भूल तथा इसके विषय में भी भूल की विधि क्या है। हेल के अनुसार “उन वस्तुओं को न जानना जिसे जानने के लिए हर कोई बाध्य है, क्षम्य नहीं है।”

Question 2. ‘ तथ्य की भूल ‘ और ‘ विधि की भूल ‘ के अन्तर को स्पष्ट कीजिये ।

◼️ तथ्य की भूल – विधि की भूल :

1.🔹तथ्य की भूल क्षम्य है ।

   🔹विधि की भूल क्षम्य नहीं है ।

2.🔹भारतीय दण्ड संहिता की धारा 76 व 79 के प्रावधान तथ्य की भूल से सम्बन्धित है ।

   🔹भारतीय दण्ड संहिता की किसी भी धारा में विधि की भूल के कोई प्रावधान नहीं है ।

3.🔹तथ्य की भूल में व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध नहीं होता है , बल्कि इसका केवल अनुमान लगाया जा सकता है ।

   🔹विधि की भूल में व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध होता है ।

👉 इग्नोरेन्शिया जूरिस नॉन एक्यक्यूसेट” (Ignorantia Juris non-excusat) के सिद्धान्त का तात्पर्य है “विधि की अनभिज्ञता कोई बचाव नहीं है। ” कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा कारित कार्य के परिणाम से यह कहकर बचाव नहीं कर सकता कि उसे कानून (विधि) की जानकारी नहीं थी।

👉 Ignorantia Facti-excusat “तथ्य की भूल क्षम्य है” इस लैटिन सूत्र को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 76 व 79 में समावेशित किया गया है।

Question 3. एक कामगार उचित चेतावनी देकर छत से बर्फ फेंकता है । एक राहगीर की मृत्यु हो जाती है । कामगार किस अपराध का दोषी है ?

◼️ मृत्यु आकस्मिक थी , इसलिए दोषी नहीं है ।

धारा 80 )

Question 4.भारतीय दण्ड संहिता की कौन सी धारा आवश्यकता के सिद्धान्त से सम्बन्ध रखती है ?

◼️ धारा 81

Question 5. भारतीय दण्ड संहिता में न समझ गुड़िया’ का सिद्धान्त, आपराधिक दायित्व का अपवाद किस धारा में है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 82 सात वर्ष से कम आयु के शिशु के कार्य के संबंध में प्रावधान करती है

👉 जिसके अनुसार कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है। इसे ‘न समझ गुड़िया’ का सिद्धांत भी कहा जाता है।

Question 6. चिकित्सकीय पागलपन एवं विधिक पागलपन के मध्य क्या अन्तर है ?

◾चिकित्सकीय कारणों पर आधारित उन्मत्तता को चिकित्सीय पागलपन कहते है .

◾जबकि अपराध करते समय उस कार्य की प्रकृति समझने की असमर्थता को विधिक पागलपन कहा जाता है ।

धारा 84 ]

Question 7. सूत्र “सहमति से कारित क्षति को क्षति नहीं कहते हैं”। भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में समाविष्ट है ?

◼️ सहमति का सिद्धान्त भारतीय दण्ड संहिता की धारा 87 में उपबंधित है।

◼️ धारा 87 का सिद्धांत रोमन विधि के एक विख्यात सूत्र पर आधारित है कि “स्वेच्छा से किये गये कार्य के लिए। क्षति प्राप्त नहीं होती” (Volenti non fit injuria)

Question 8. भारतीय दण्ड संहिता की कौन-सी धारा उन शर्तों का वर्णन करती है। जिनमें प्राप्त की गई सहमति को स्वतंत्र सहमति नहीं माना जाता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 90 में उन शर्तों का वर्णन किया गया है जिसमें प्राप्त की गई सहमति स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जाती है।

👉 धारा 90 के अनुसार निम्नलिखित मामलों में दी गयी सहमति स्वतंत्र सहमति नहीं है-

(1) अपहानि के भय में दी गई सहमति,

(2) तथ्य के भ्रम के अन्तर्गत दी गई सहमति,

(3) 12 वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा दी गई सहमति, (4) विकृतचित व्यक्ति द्वारा दी गई सहमति,

(5) मत्त व्यक्ति द्वारा दी गई सहमति ।

Question 9. इंग्लिश विधि सूत्र ” Actus me invito factus non est meus actus से क्या तात्पर्य है

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 94 इंग्लिश विधि के सूत्र ” Actus me invito factus non est meus actus ” मेरे द्वारा मेरी इच्छा के विरुद्ध किया गया कार्य मेरा नहीं है ” पर आधारित है ।

Question 10. ” तुच्छ कार्य ” का क्या तात्पर्य है ?

◾ऐसी बात , जिसके लिये सामान्य समझ और स्वभाव का व्यक्ति , ऐसी तुच्छ हानि हेतु , शिकायत नहीं करेगा ।

धारा 95 ] 

◼️◼️अध्याय 4 : साधारण अपवाद

SEC 96 TO 106

Question 1. संहिता की धारा 96 प्राइवेट प्रतिरक्षा के बारे में क्या उद्घोष करती है ?

◼️ धारा 96 के अनुसार , कोई बात अपराध नहीं है जो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है ।

Question 2. संहिता की कौन – सी दो धारायें मिलकर प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के सिद्धान्त को निर्मित करती हैं ?

◼️ धारा 97 एवं 99

Question 3. हर व्यक्ति को धारा 97 के अंतर्गत किन अपराधों के विरुद्ध सम्पत्ति सम्बन्धी अधिकार उपलब्ध हैं ?

◼️ हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध जो चोरी , लूट , रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाषा में आने वाला अपराध है , या इनका प्रयत्न है , अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की चाहे जंगम चाहे स्थावर सम्पत्तििा की प्रतिरक्षा करे ।

Question 4. संहिता की धारा 99 में उल्लिखित कौन से कार्य हैं जिनके विरूद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है ?

◼️ इस प्रकार के कार्यों की संख्या 4 है

( i ) लोक सेवक द्वारा सद्भावपूर्वक पदाभास में कार्य करना

( ii ) सद्भावपूर्वक पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक के निर्देश से कार्य करना ।

( iii ) जिनमें सुरक्षा के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने का समय हो ।

( iv ) उतनी अपहानि से अधिक अपहानि नहीं , जितनी प्रतिरक्षा के प्रयोजन से करनी आवश्यक है ।

Question 5. धारा 100 में कौन – कौन से अपराध हैं , जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार हमलावर की मृत्यु कारित करने तक विस्तारित है ?

◼️ वे अपराध निम्नलिखित हैं

1. युक्तियुक्त आशंका कि अन्यथा हमले का परिणाम मृत्यु होगा ;

2. युक्तियुक्त आशंका कि अन्यथा हमले का परिणाम गम्भीर चोट होगा ;

3. बलात्कार करने के आशय से किया गया हमला ;

4.प्रकृति विरुद्ध कामतृष्णा की प्राप्ति के आशय से किया गया हमला ;

5. व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;

6. इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाये , जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़ाने के लिए लोक प्राधिकारियों की सहायता नहीं प्राप्त कर सकेगा ;

7. अम्ल फेंकने या देने का कृत्य या अम्ल फेंकने या देने का प्रयास करना जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप अन्यथा घोर उपहति कारित होगी ।

Question 6. सम्पत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार चोरी के विरुद्ध कब तक बना रहता है ?

◼️ सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार चोरी के विरुद्ध , अपराधी के सम्पत्ति सहित पहुँच से बाहर हो जाने तक अथवा या तो लोक प्राधिकारियों की सहायता अभिप्राप्त कर लेने या सम्पत्ति प्रत्युद्धृत हो जाने तक बना रहता है ।

Question 7. सम्पत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार में हमलावर की मृत्यु कारित की जा सकती है , किन परिस्थितियों में बताइए ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 103 के अनुसार निम्नलिखित मामलों में सम्पत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार में हमलावर की मृत्यु कारित की जा सकती है-

1. जबकि हमला लूट का हो,

2. रात्रि गृह भेदन,

3. अग्नि द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे निर्माण, तम्बू या जलयान को की गई है जो मानव आवास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

4. चोरी, रिष्टि या गृह अतिचार जबकि परिणाम मृत्यु / घोर उपहति का हो।

Question 8. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के  प्रावधानों में से किसमें व्यक्तिगत शारीरिक प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु को छोड़कर अन्य कोई भी हानि करने तक होता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 101 के अनुसार, शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावार की मृत्यु स्वेच्छा से कारित करने तक नहीं होता है, किन्तु इस अधिकार का विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बन्धों के अधीन रहते हुए हमलावार की मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छा से कारित करने तक होता है।

◼️◼️अध्याय 5 : दुष्प्रेरण के विषय में
SEC 107 TO 120

Question 1. यह कब कहा जा सकता है कि एक व्यक्ति किसी बात का दुष्प्रेरण कर रहा है ? 

◼️ वह व्यक्ति किसी बात का दुष्प्रेरण करता है , जो उस बात को करने के लिए  –

पहला – किसी व्यक्ति को उकसाता है ; अथवा

दूसरा अन्य व्यक्तियों के साथ षड्यंत्र में सम्मिलित होता है , अथवा

तीसरा– किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा साशय सहायता करता है ।

धारा 107 ]

◼️भा.द.सं. की धारा 107 में दुष्प्रेरण के अपराध को परिभाषित किया गया है जिसके अनुसार, दुष्प्रेरण का अपराध निम्न तीन प्रकार से हो सकता है।

(1) उकसाने द्वारा

(2) षडयंत्र द्वारा

(3) सहायता द्वारा

दुष्प्रेरण का अपराध तभी पूर्ण होता जाता है – जैसे ही दुष्प्रेरक किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने के लिए दुष्प्रेरित करता है भले ही दुष्प्रेरित व्यक्ति अपराध करे या न करे

Question 2. क्या किसी कार्य को करने के लिए प्रयत्न मात्र भी उकसाना हो सकता है ?

◼️ हाँ !

जैसे– ‘ क ‘ एक लोक सेवक ‘ ख को घूस देने का प्रयत्न करता है , परन्तु ‘ ख ‘ उसे लेने से इन्कार कर देता है , किन्तु क दुष्प्रेरण का अपराध करता है ।

Question 3. क्या एक व्यक्ति एक कार्य करने में सहायता पहुँचाने के कारण दण्डित हो सकेगा यदि वह कार्य किया ही नहीं जाता ?

◼️ नहीं !

◼️ दुष्प्रेरण गठित करने के लिए सहायता तब तक पर्याप्त नहीं जब तक कि आशयित कृत्य यथार्थतः घटित नहीं हो जाता तथा उसे सहायता प्राप्त नहीं हो जाती ।

Question 4. ‘ क ‘ , ‘ ख ‘ को जो 7 वर्ष से कम आयु का शिशु है , ‘ प ‘ की हत्या करने के आशय से उकसाता है । ‘ ख ‘ दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप वह कार्य , ( जिससे ‘ प ‘ की मृत्यु होती है ) ‘ क ‘ की अनुपस्थिति में करता है और उससे ‘ प ‘ की मृत्यु कारित करता है । क और ख ने कौन सा अपराध किया ?

◼️ ‘ ख ‘ ने कोई अपराध नहीं किया क्योंकि वह विधि अनुसार समर्थ नहीं था

👉 फिर भी ‘ क ‘ धारा 108 के स्पष्टीकरण ( 3 ) के आलोक में उसी प्रकार से दण्डनीय है , मानो ‘ ख ‘ वह अपराध करने के लिए विधि अनुसार समर्थ हो और उसने हत्या की हो ।

Question 5. धारा 109 के अंतर्गत दुष्प्रेरक किस दण्ड से दण्डनीय होता है ? 

◼️ उसी दण्ड से दण्डनीय है जो प्रमुख अपराधी के लिए उपबंधित है ।

Question 6. जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है तो दुष्प्रेरक का आपराधिक दायित्व क्या होगा ?

◼️ ऐसी स्थिति में दुष्प्रेरक उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व के अधीन है मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो ,

◼️ परन्तु यह तब जबकि किया गया कार्य , दुष्प्रेरण का अधिसंभाव्य परिणाम था और उस उकसाहट के असर के , या सहायता , या षडयन्त्र के अनुसरण में किया गया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है

धारा 111 ]

Question 7. भीड़ को उकसाना कब अपराध बन सकता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता कि धारा 117 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों की किसी भी संख्या या वर्ग द्वारा किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

👉 इस प्रकार भीड़ को उकसाने का अपराध तब बनता है जब 10 या अधिक व्यक्तियों को कोई अपराध करने हेतु दुष्प्रेरित किया जाता है।

Question 8. ‘अपराध किये जाने के वक्त दुष्प्रेरक की उपस्थिति’ वर्णित हैं, भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में  ?

◼️ धारा 114

◼️◼️अध्याय 5 A : आपराधिक षड्यंत्र + अध्याय 6 राज्य के विरुद्ध अपराध
SEC 120 A TO 130

Question 1. किस वर्ष में भारतीय दण्ड संहिता में। आपराधिक षड्यन्त्र को सम्मिलित किया गया था ?

◼️ आपराधिक षड़यन्त्र ( criminal conspiracy) को भारतीय दण्ड संहिता में 1913 में अध्याय 5-A के रूप में जोड़ा गया।

◼️धारा 120-A में आपराधिक षड़यन्त्र को परिभाषित किया गया है तथा दण्ड का प्रावधान 120-B में किया गया है।

Question 2. आपराधिक षड्यंत्र की परिभाषा क्या है ?

◾भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 – A में आपराधिक षडयंत्र को परिभाषित किया गया है ।

आपराधिक षडयंत्र के निम्नलिखित तत्व हैं

1. दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच कोई सहमति जिन पर षडयंत्र करने का कोई आरोप हो ,

2. सहमति

( a ) कोई अवैध कार्य , या 
( b ) कोई कार्य जो यद्यपि अवैध नहीं है , अवैध साधनों द्वारा करने या करवाने के लिए किया जाये ।

👉 आपराधिक षडयंत्र मात्र दो या दो से अधिक व्यक्तियों के आशय द्वारा गठित नहीं होता अपितु इसके लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच कोई अवैध कार्य या अवैध साधनों द्वारा वैध कार्य को करने के लिए सहमति होना आवश्यक है ।

👉 एक कार्य आपराधिक हुए बिना भी अवैध हो सकता है । अतः इस के प्रकार के कार्य को करने की सहमति आपराधिक षड्यंत्र के तुल्य हो सकती है ।

◾ आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड धारा 120 ( b )

उदाहरण – ‘A’ और ‘B’, ‘C’ के मकान में चोरी करने के लिए सहमत हो जाते हैं लेकिन वास्तव में चोरी नहीं करते हैं। उन्होंने आपराधिक षड्यंत्र का अपराध किया है

धारा 120 A के तहत आपराधिक षड्यंत्र के अपराध के लिए सहमति मात्र से ही दायित्व उत्पन्न हो जाता है। धारा 120 A में उपबंध किया गया है। कि जबकि दो या अधिक व्यक्ति-
1. कोई अवैध कार्य अथवा
2. कोई ऐसा कार्य जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा करने या करवाने को सहमत होते हैं, तब ऐसी सहमति आपराधिक षड्यंत्र कहलाती है।

Question 3. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा में यह उपबन्धित है कि जो कोई मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष या उससे अधिक के कठिन कारावास से दण्डनीय एक अपराध करने के लिए एक अपराधिक षड्यंत्र में शरीक होगा, यदि ऐसे पड्यंत्र के दण्ड के लिए इस संहिता में कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है, तो वह उसी प्रकार दण्डित किया जायेगा, मानो उसने ऐसे अपराध का दुष्प्रेरण किया था।

◼️ धारा 120 B

Question 4. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के तहत कौन-सा प्रयत्न दण्डनीय अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के तहत उपरोक्त सभी अपराधों का प्रयत्न निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है-

👉 धारा 121 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करेगा या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा, वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी | दण्डनीय होगा।

👉 धारा 125 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाले किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

👉 धारा 398 में प्रावधान किया गया है कि यदि लूट या डकैती करने का प्रयत्न करते समय अपराधी किसी घातक आयुद्ध से सज्जित होगा, तो वह कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष से कम का नहीं होगा, दण्डित किया जायेगा।

🔘 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 122 के अंतर्गत भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से तैयारी तथा धारा 399 के अंतर्गत डकैती डालने की तैयारी को दण्डनीय बनाया गया है।

Question 5. राजद्रोह का अपराध क्या है, संक्षेप में स्पष्ट करें ?

धारा 124 – A राजद्रोह से सम्बन्धित है । इसको भारतीय दंड संहिता में सन् 1870 में जोड़ा गया था ।

◾इस धारा के अन्तर्गत अपराध का निर्माण करने के लिए निम्नलिखित दो तत्वों की उपस्थिति आवश्यक है

1. भारत सरकार के प्रति घृणा या अवमानना उत्पन्न करना या उत्पन्न करने का प्रयत्न करना या अप्रीति प्रदीप्ति करने का प्रयत्न करना ।

2. ऐसे कार्य या प्रयास को

( a ) बोले या लिखे गये शब्दों द्वारा , या

( b ) . संकेतों द्वारा , या

( c ) दृश्यरूपण द्वारा करना ।

👉 धारा 124 – A के अन्तर्गत अपराध होने के लिए हिंसा या लोक व्यवस्था को उकसाने के आशय की आवश्यकता नहीं होती । इस धारा के अन्तर्गत अपराध का सार है कि किस आशय से भाषा का प्रयोग किया गया है

👉 भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 124A के अनुसार, जो कोई राजद्रोह का अपराध करेगा वह आजीवन कारावास से जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या तीन वर्ष तक के कारावास से जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा, या जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

Question 6. “क” एक लोक सेवक है और उस हैसियत से वह एक राजकैदी को अभिरक्षा में रखे हुए था। वह स्वेच्छया उस कैदी को ऐसे स्थान से जिसमें वह कैदी परिरूद्ध था, निकल भागने देता है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अधीन वो दण्डनीय होगा ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 128 के अनुसार, जब किसी लोक सेवक द्वारा स्वेच्छया किसी राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने दिया जाता है

◼️ तब ऐसा लोक सेवक आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

◼️◼️अध्याय 8 : लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराध
SEC 141 TO 160

Question 1. विधि विरूद्ध जमाव क्या है इसके  आवश्यक तत्व स्पष्ट करे |

5 या अधिक व्यक्तियों का जमाव एक विधि विरूद्ध जमाव है यदि उनका सामान्य उद्देश्य

( 1 ) आपराधिक बल के प्रयोग द्वारा

( a ) केन्द्रीय सरकार या
( b ) राज्य सरकार या
( c ) संसद या
( d ) किसी लोक सेवक में से किसी को आतंकित करना है ।

( 2 ) किसी विधि या विधिक आदेशिका के निष्पादन का प्रतिरोध करना

( 3 ) रिष्टि या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध करना

( 4 ) आपराधिक बल द्वारा
( a ) किसी सम्पत्ति का कब्जा लेना या
( b ) किसी व्यक्ति को अमूर्त अधिकार से वंचित करना ( c ) किसी अधिकार या अनुमानित अधिकार को प्रवर्तित करना ।

( 5 ) किसी व्यक्ति को आपराधिक बल या उसके प्रदर्शन द्वारा
( a ) वह कार्य करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैधतः आबद्ध नहीं है , या
( b ) उस कार्य का लोप करने के लिए जिसे करने के लिए वह वैधतः हकदार है , विवश करना है ।

दंड – धारा 146 के अनुसार 6 मास तक का कारावास या जुर्माना या दोनों

Question 2. जो कोई विधि विरूद्ध जमाव का सदस्य होगा वह भारतीय दण्ड विधान के किस धारा में दण्डित किया जायेगा ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 143 के अनुसार, जो कोई विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि 6 मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Question 3. बलवा करना से क्या अभिप्राय है ?

धारा 146 के अनुसार जब कभी विधि विरूद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में

◾बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है तब ऐसे जमाव का सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा ।

👉 बलवा करने के अपराध के आवश्यक तत्व 

– अभियुक्तों की संख्या 5 या अधिक हो तथा वे विधि विरूद्ध जमाव निर्मित करते हों ,

– अभियुक्तों का एक ही सामान्य उद्देश्य हो ,

– विधि विरूद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी एक सदस्य द्वारा सामान्य उद्देश्य के अनुसरण में बल या हिंसा का प्रयोग होना चाहिए ।

◾ बलवा करने के लिए दंड धारा 147 के अनुसार 2 वर्ष तक का कारावास ( किसी भी भाति का ) या जुर्माना या दोनों

Question 4. एक मामले में यह पाया गया की नौ बलवाइयों में से केवल तीन लोग घातक आयुध लिए हुए थे और बाकी लोग किसी घातक आयुध से सज्जित नहीं थे। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अधीन वो तीन बलवाई दण्डनीय होंगे ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 148 में घातक आयुधों से सज्जित होकर बल्वा करना दण्डनीय बनाया गया है।

◼️ धारा 148 के अनुसार, जो कोई घातक आयुध से, या किसी ऐसी चीज से, जिससे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मृत्यु कारित होनी सम्भाव्य हो, सज्जित होते हुए बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Question 5. सामान्य उद्देश्य से सम्बन्धित अपराध के प्रमुख तत्व क्या हैं ?

1. विधि विरूद्ध जमाव के किसी सदस्य द्वारा कोई अपराध किया जाना चाहिए ।

2. ऐसा अपराध जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में किया जाना चाहिए या ऐसा हो जिसका किया जाना जमाव का हर सदस्य संभाव्य जानता हो ।

Sec 149 ]

Question 6. धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन करना किस धारा में दण्डनीय है ?

◾ धारा 153 – A

Question 7.भारतीय दण्ड संहिता की कौन-सी धारा कुछ मामलों में प्रतिनिधिक दायित्व से सम्बन्धित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 154 प्रतिनिधिक दायित्व के सिद्धान्त पर कार्य करते हुए भू-स्वामी अथवा भूमि के अधिभोगी को दण्ड योग्य बनाती है।

👉 काजी जमालुद्दीन अहमद (1901) के मामले में न्यायालय द्वारा यह धारित किया गया कि धारा 154 के अन्तर्गत भू-स्वामी अथवा अधिभोगी को अपने अभिकर्ता के कार्यों अथवा आशय की जानकारी आवश्यक नहीं है

Question 8. दंगा क्या है ?

◾जबकि दो या आधिक व्यक्ति लोक स्थान में लड़कर लोक शाँति में विघ्न डालते है , तब यह कहा जाता है कि वह दंगा करते हैं

Sec 159 ]

◼️ जगन्नाथ शाह के वाद में दो भाई आपस में एक कस्बे
के लोक मार्ग पर आपस में झगड़ा कर रहे थे तथा एक दूसरे को गालियाँ बक रहे थे। वहां काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी तथा यातायात बिल्कुल बन्द हो गया था

👉 किन्तु आघातों का आदान-प्रदान नहीं हुआ था। यह निर्णय दिया गया कि वास्तविक मारपीट के अभाव में दंगा नहीं कारित हो सकता है

◾ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 160 के अनुसार, जो कोई दंगा करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 1 मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो 100 रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

◼️◼️अध्याय 9 : लोक सेवको द्वारा या उनसे संबंधित अपराध
SEC 161 TO 171

Question 1. कौन – सी धाराएं लोक सेवकों द्वारा किये गये या उनके विरुद्ध किये गये अंपराधों से संबंधित है ?

◾दंड संहिता के अध्याय 9 की धारा 161-171

Question 2. अध्याय -9 में कौन – सी धाराएं संशोधन अधिनियम , 2013 द्वारा अंतःस्थापित है ?

धारा 166 – A व 166 – B

Question 3. जो किसी लोक सेवक होने के नाते, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तहत बलात्कार से संबंधित किसी भी जानकारी को दर्ज करने में विफल रहता है, वह भारतीय दण्ड संहिता 1860 के निम्नलिखित प्रावधानों में से किस एक के तहत दंडित होने के लिए उत्तरदायी होगा ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 166A में प्रावधान किया गया है कि जो कोई लोक सेवक होते हुए धारा 326A, 326B, 354, 354B, 370, 376, 376A, 376AB, 376B, 376C, 376D, 376DA, 376DB, 376E तथा 509 के अधीन दण्डनीय संज्ञेय अपराध के संबंध में उसे दी गई किसी सूचना को

◼️ दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 के अधीन लेखबद्ध करने में असफल रहता है तो वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि 6 मास से कम की नहीं होगी किंतु जो 2 वर्ष तक की हो सकेगी। दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Question 3. भारतीय दंड संहिता की किस धारा के तहत सार्वजनिक या निजी अस्पतालों द्वारा किसी पीड़ित का उपचार न किया जाना दण्डनीय अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 166B के अनुसार जो कोई अस्पताल, सार्वजनिक या व्यक्तिगत चाहे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित हो, का भारसाधक होते हुए

👉 दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 357C के प्रावधानो का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

अस्पताल प्रबंधन द्वारा पीड़ित के उपचार करने का उल्लंघन हेतु दंड – 1 वर्ष

Question 4. एक लोकसेवक ‘अ’, दस्तावेज का अनुवाद करने का भार वहन करते हुए, दस्तावेज का अशुद्ध अनुवाद ‘ब’ को क्षति कारित करने के आशय से करता है। ‘अ’ द्वारा किया गया अपराध है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भारतीय दण्ड संहिता की धारा 167 पर आधारित है जब लोक सेवक क्षति कारित करने के लिए अशुद्ध दस्तावेज रचता है या अशुद्ध अनुवाद करता है तो उसे तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

◼️ दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 320 एवं अनुसूची प्रथम के अनुसार यह अपराध संज्ञेय, जमानतीय तथा अशमनीय है।

Question 5. लोक सेवकों के छद्म रूप धारण करके कोई कार्य करना या उसका प्रयत्न करना किस धारा में दंडनीय है ?

◾संहिता की धारा 170 में ।

👉 भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 170 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई लोक सेवक का प्रतिरूपण करेगा या प्रयत्न करेगा, वह 2 वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 6. वैध रूप से आबद्ध लोक सेवक द्वारा विधि – विरुद्ध रूप से किसी व्यापार में संलग्न होने पर कितनी सजा का प्रावधान है ?

धारा 168 के अनुसार – सादा कारावास

👉 जो 1 माह तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों । 

◼️◼️अध्याय 10 : लोक सेवको के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में
SEC 172 TO 190

Question 1. एक न्यायाधीश के द्वारा जारी किए गए समन की पालना में उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए भी , ‘ क ‘ उपस्थित होने में साशय लोप करता है । ‘ क ‘ ने कौनसा अपराध किया ?

◾’ क ‘ ने लोक सेवक ( न्यायाधीश ) का आदेश न मान कर गैरहाजिर रहने का अपराध किया ।

धारा 174 ]

👉 दंड 1 मास सादा कारावास या जुर्माना ₹500 तक

Question  2. ‘ अ ‘ ने एक जिला न्यायालय के समक्ष एक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिये वैध रुप से आबद्ध है , जानबूझ कर प्रस्तुत नहीं करता है । उसने किस धारा में परिभाषित अपराध किया ?

◾’ अ ‘ ने जिला न्यायालय के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने का साशय लोप किया । उसने धारा 175 , भारतीय दण्ड संहिता का अपराध किया है ।

धारा 175 – दृष्टान्त ]

👉 दंड 6 मास सादा कारावास या जुर्माना ₹1000 तक

Question 3. ‘ अ ‘ . यह जानते हुए कि उसके खेत की सीमा के भीतर हत्या का अपराध हुआ हैं , जान बूझकर मजिस्ट्रेट को यह मिथ्या इत्तिला देता हैं कि मृत्यु उसके ऊपर एक पेड़ के  गिरने से दुर्घटना से हुई हैं । ‘ अ ‘ ने कौन – सा अपराध किया हैं ?

◾ ‘ अ ‘ ने लोकसेवक को सच्ची इत्तिला के रूप में जानबूझ कर मिथ्या इत्तिला देने का अपराध किया ।

धारा 177 ]

👉 दंड 2 वर्ष किसी भी भाति का कारावास या जुर्माना या दोंनो

Question 4. अगर कोई व्यक्ति सक्षम लोक सेवक अथवा लोक आफिसर के समक्ष शपथ ले कर सत्य कथन करने से इन्कार करता है , किसी वैध प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करता है । और अपने कथन पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करता है , जिसके लिये वह आबद्ध है , तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की कौन – कौनसी धाराओं के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध करता है ?

◾ : अपराध अन्तर्गत धारा 178 , 179 एवम् 180 , भारतीय दण्ड संहिता ।

Question 5. पुलिस स्टेशन का भारसाधक अधिकारी ‘ क ‘ , ‘ ख ‘ द्वारा उसके गाँव में हुई हत्या व डकैती की मौखिक इत्तिला को लिख लेता है । जब ‘ क ‘ , ‘ ख ‘ को उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कहता है तो ‘ ख ‘ इन्कार कर देता है । क्या यह एक अपराध है ?

◾’ ख ‘ ने सक्षम लोक सेवक द्वारा अपेक्षा करने पर कथन / इत्तिला पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करने का अपराध किया ।

धारा 180 ]

Question 6. ‘ अ ‘ एक पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी ‘ स ‘ को जानबूझ कर ‘ ब ‘ के विरूद्ध मिथ्या इत्तिला यह जानते हुए देता है जिससे कि यह सम्भाव्य है कि उसकी इत्तिला के परिणामस्वरूप ‘ ब ‘ के निवास स्थान पर अनावश्यक रूप से तलाशी लेते हुए ‘ ब ‘ को क्षोभ उत्पन्न किया जायेगा और लोक सेवक ‘ स ‘ द्वारा अपनी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग किया जायेगा । ‘ अ ‘ द्वारा कौनसा अपराध किया गया ?

◾ ‘ अ ‘ ने भारतीय दण्ड संहिता का अपराध अन्तर्गत धारा 182 कारित किया ।

Question 7. भारतीय दंड संहिता, 1860 की निम्नलिखित में से किस धारा के तहत सहायता देने के लिए कानून द्वारा बाध्य होने पर लोक सेवक की सहायता करने में चूक एक दंडनीय अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 187 के अनुसार, जो कोई किसी लोक सेवक को उसके लोक कर्त्तव्यों के निष्पादन में सहायता देने या पहुंचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुए ऐसी सहायता देने का साशय लोप करेगा,

◼️ वह सादा कारावास से जिसकी अवधि 1 मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो 200 रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Question 8. क ‘ द्वारा लोक सेवक द्वारा जारी किये गये विधिक आदेश की अवज्ञा की जाती है एवम् लोक सेवक को क्षति पहुंचाने की धमकी भी दी जाती है । बताइये कि क ने कौन – कौन से अपराध कारित किये ।

◾’क’ द्वारा भारतीय दण्ड संहिता के अपराध अन्तर्गत धारा 188 और 189 कारित किये गये हैं । 

◼️◼️अध्याय 11 : मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध
SEC 191 TO 205

Question 1. ‘ अ ‘ सशपथ सत्य कथन करने हेतु आबद्ध होने के बावजूद भी न्यायालय के समक्ष मिथ्या कथन करता है । उसने कौनसा अपराध कारित किया ?

◼️ ‘ अ ‘ मिथ्या साक्ष्य देने का दोषी है ।

धारा 191 ]

Question 2. ‘ क ‘ अपनी दुकान की बही में एक मिथ्या प्रविष्टि ( false entry ) करता है , जिसका प्रयोजन यह था कि न्यायालय में इसे सम्पोषक ( corroborative ) साक्ष्य के रूप में काम में लाई जावे । ‘ क ‘ का दायित्व निर्धारित कीजिये ।

◼️ : ‘ क ‘ ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ा है ।

धारा 192- दृष्टांत ( ख ) ]

Question 3. ‘ क ‘ एक बॉक्स में जो ‘ य ‘ का है , इस आशय से आभूषण रखता है कि वे बॉक्स में पाए जाएं और इस परिस्थिति से ‘ य ‘ चोरी के लिए सिद्धदोष ठहराया जाए । क्या ‘ क ‘ ने कोई अपराध किया ? यदि हां तो कौनसा ?

◼️ ‘ क ‘ मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का दोषी है ।

धारा 192 – दृष्टांत ( क ) ]

Question 4. व्यवहार प्रक्रिया संहिता के आदेश 37 के अधीन एक दावे के समर्थन हेतु ” ब ” अपनी बही में एक मिथ्या प्रविष्टि करता हैं । उसने भारतीय दण्ड संहिता , 1860 के अन्तर्गत क्या अपराध किया ?

◼️ ” ब ” अपनी बही में एक मिथ्या प्रविष्टि इस आशय से करता है कि वह इसको न्यायालय में सम्पोषक साक्ष्य के रूप में काम में लाई जाये । इस प्रकार ” ब ” ने मिथ्या साक्ष्य गढा है ।

उसने यह मिथ्या प्रविष्टि न्यायालय में सम्पोषक साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त करने के लिये तैयार की थी । इस मिथ्या प्रविष्टि को तैयार करने का आधार यह था कि न्यायालय इस प्रविष्टि के सम्बन्ध में गलत राय बनाये जो तात्विक रूप से महत्वपूर्ण हो ।

धारा 192 ]

Question 5. न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य देने पर दण्ड निर्धारित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 193 न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य देने पर दण्ड का प्रावधान करती है।

◼️ धारा 193 के अनुसार, जो कोई साशय किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में मिथ्या साक्ष्य देगा या किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में उपयोग में लाये जाने के प्रयोजन से मिथ्या साक्ष्य गढ़ेगा,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 6. झूठी गवाही देने के लिए किसी व्यक्ति को धमकी देना या उत्प्रेरित करना भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा के अधीन दण्डनीय है।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 195A किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकी देना या उत्प्रेरित करने से सम्बन्धित है।

◼️ धारा 195A के अनुसार, जो कोई किसी दूसरे व्यक्ति को, उसके शरीर, सम्पत्ति और ख्याति को अथवा ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को जिसमें वह हितबद्ध है, यह कारित करने के आशय से कोई क्षति करने की धमकी देता है, कि वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य दे तो वह दोनों से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 7. ‘ अ ‘ यह जानते हुए कि ‘ ब ‘ ने ‘ स ‘ की हत्या की है , ‘ अ ‘ ने ‘ ब ‘ को दण्ड से प्रतिच्छादित ( Screening ) करने के आशय से , ” ब ‘ को ‘ स ‘ की लाश को छिपाने में सहायता करता है । ‘ अ ‘ ने कौनसा अपराध कारित किया ?

◼️  ‘ अ ‘ ने साक्ष्य को विलोपित करने का अपराध कारित किया ।

धारा 201- दृष्टांत ]

Question 8. इत्तिला देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप किया जाता है यह
भा.द.वि. की किस धारा के अन्तर्गत आता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 202 के अन्तर्गत इत्तिला देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप किये जाने को दण्डनीय बनाया गया है।

👉 इसके अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति को छः माह तक के कारावास तथा जुर्माने से दण्डित किया जाता है।

Question 9. एक पुलिस अधिकारी ने एफ.आई.आर. नष्ट कर दिया। क्योंकि वह अन्य व्यस्तता के कारण जांच नहीं कर सका, किन्तु बाद में मीडिया में रिपोर्ट आने पर पूरी तरह से भिन्न तथ्य के आधार पर एक नया रिपोर्ट बनाया। यदि उसने कोई अपराध किया है तो वह क्या है ?

◼️ आई.पी.सी. की धारा 204 के अनुसार साक्ष्य के रूप में इसे प्रस्तुत करने से रोकने के लिए दस्तावेज को नष्ट करना

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 204 के अनुसार, जो कोई साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का पेश किया जाना निवारित करने के लिए उसको नष्ट करने का अपराध कारित करता है,

👉 तो वह दोनो में से किसी भाँति के कारावास जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

◼️◼️अध्याय 11 : मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध
SEC 206 TO 220

Question 1. भारतीय दण्ड संहिता की कौन-सी धारा बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करने के लिए दण्ड का प्रावधान रखती है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 209 के अनुसार, जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से या किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ कारित करने के आशय से न्यायालय में कोई ऐसा दावा करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता हो,

◼️ वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 2. ‘अ’, ‘ब’ के विरूद्ध, ऐसी राशि के लिए डिक्री प्राप्त करता है जो उसे देय नहीं है। यह भा. दं. सं. के तहत एक अपराध है। यदि ‘अ’ ने ऐसा-
(a) negligently /उपेक्षापूर्वक किया
(b) fraudulently / कपटपूर्वक किया ✅
(c) in good faith /सद्भावनापूर्वक किया
(d) none of the above / उपरोक्त में से कोई नहीं

◼️ प्रश्नगत समस्या में ‘अ’ ने भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 210 के अधीन अपराध कारित किया है।

◼️ धारा 210 के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति, ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है। कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करता है तो वह दोषी होगा, जिसे दो वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जायेगा।

Question 3. न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में ‘ अ ‘ ‘ ब ‘ के विरूद्ध एक परिवाद प्रस्तुत करता है , जिसमें ‘ ब ‘ के विरूद्ध मिथ्या आरोप इस आशय से लगाता है कि ‘ ब ‘ को आरोपित अपराध की सजा मिल सके अथवा उसे क्षति पहुंचे । ‘ अ ‘ ने कौनसा अपराध किया ?

◼️ : ‘ अ ‘ ने ‘ ब ‘ पर क्षति कारित करने के आशय से मिथ्या आरोपित करने का अपराध किया ।

धारा 211 ]

Question 4. ‘ अ यह जानते हुए कि ‘ ब ‘ ने ‘ स की हत्या की थी ‘ ब ‘ को वैध दण्ड से बचाने के आशय से संश्रय देता है व उसे छिपा लेता है । ‘ अ ‘ कौनसे अपराध का दोषी है ?

◼️ ‘ अ ‘ साशय अपराधी को संश्रय देने के अपराध का दोषी है ।

धारा 212 ]

Question 5. एक थानाधिकारी द्वारा किसी अभियुक्त को वैध दण्डादेश से बचाने के आशय से पुलिस केस डायरी में गलत प्रविष्टियां की जाती है । थानाधिकारी द्वारा कौनसा अपराध किया गया ?

◼️ : थानाधिकारी ने एक लोक सेवक होते हुए अभियुक्त को दण्ड से बचाने के आशय से गलत ( incorrect ) अभिलेख तैयार करने का अपराध किया ।

धारा 218 ] 

◼️◼️अध्याय 11 : मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध

SEC 221 TO 229 A

Question 1. थानाधिकारी ‘ ख ‘ पुलिस थाने से अभियुक्त ‘ क ‘ को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में रेलगाड़ी से ले जा रहा था । रास्ते में ‘ ख ‘ को नींद आ जाने का फायदा उठा कर ‘ क ‘ रेल से निकल भाग जाता है । ‘ क ‘ तथा ‘ ख ‘ ने क्रमशः कौन – कौनसे अपराध कारित किये ?

◾( i ) ‘ ख ‘ लोक सेवक ‘ क ‘ अभियुक्त को अपनी उपेक्षा ( negligence ) से विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने को सहन करने का अपराधी है ।

◾( ii ) ‘ क ‘ विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने का दोषी है ।

धारा क्रमश : 223 व 224 ]

Question 2. जब एक व्यक्ति अच्छे व्यवहार किए जाने हेतु जमानत प्रस्तुत करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास ले जाते समय वैध हिरासत से भागने का प्रयास करता है तो उसे भा.दं.सं. की किस धारा के प्रावधानों के अन्तर्गत दण्डित किया जा सकता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 225-B के अनुसार, जो कोई स्वयं अपने या किसी अन्य व्यक्ति के विधिपूर्ण पकड़े जाने में साशय कोई प्रतिरोध करेगा या अवैध बाधा डालेगा या किसी अभिरक्षा में से जिसमें वह विधिपूर्वक निरुद्ध हो, निकल भागेगा या भागने का प्रयत्न करेगा,

◼️ वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 6 मास तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 3. सेशन न्यायाधीश ‘ ख ‘ की न्यायालय में ‘ क ‘ अभियुक्त , जो कि हत्या व डकैती के मामले में आरोपी था , ने न्यायाधीश पर साशय भ्रष्टाचार व पक्षपात का आरोप लगाता है तथा गाली – गलौच करता है । ‘ क ‘ ने कौनसा जुर्म किया ?

◾ ‘ क ‘ न्यायिक कार्यवाही कर रहे लोक सेवक ( सेशन न्यायाधीश ) ‘ ख ‘ की साशय अवमानना करने व न्यायिक कार्यवाही में विघ्न डालने का दोषी है ।

धारा 228 तथा न्यायालय अवमानना अधिनियम ]

Question 4. एक अधिवक्ता ‘ क ‘ ने बहस के दौरान जानबूझकर एक मजिस्ट्रेट का अपमान किया । ‘ क ‘ पर किस अधिनियम में मुकदमा चलेगा अथवा भारतीय दण्ड संहिता में ?

◾ अधिवक्ता ‘ क ‘ मजिस्ट्रेट की कार्यवाही में जानबूझकर विघ्न डालता है और अपमान करता है ।

◾अतः उसके विरूद्ध न्यायालय की कार्यवाही के दौरान लोक सेवक का साशय अपमान करने या विघ्न डालने के कारण कार्यवाही की जायेगी ।

धारा 228 ] 

Question 5. बलात्कार पीड़िता की पहचान या नाम का उजागर करने पर दण्ड की व्यवस्था भारतीय दण्ड संहिता की निम्नलिखित में से किस धारा में की गई है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 228-A में कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित की पहचान के प्रकटीकरण को दण्डनीय बनाया गया है।

◼️ धारा 376, धारा 376-A, धारा 376– AB, धारा 376-C, धारा 376-D, धारा 376- DA, धारा 376- DB, तथा धारा 376-E के अधीन किसी अपराध के पीड़ित का पहचान प्रकट करना अपराध है।

👉 यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन अपराध कारित करता है तो वह किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 229क के प्रावधान के अंतर्गत कार्यवाही करने के लिए कौन सा न्यायालय सक्षम है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 229A के अंतर्गत कोई भी मजिस्ट्रेट कार्यवाही करने के लिए सक्षम होगा।

👉 धारा 229A में जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर न होने पर दण्ड का उपबंध किया गया है।

Question 7. “क” एक अपराध से आरोपित किये जाने पर और जमानत पर छोड़ दिए जाने पर जमानत के निबंधनों के अनुसार न्यायालय में पर्याप्त कारणों के बिना हाजिर होने में असफल रहता है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अधीन उसके इस प्रकार न्यायाल में हाजिर होने में असफल होने के लिए वह दण्डनीय होगा ?

◼️ जब किसी व्यक्ति पर आरोप लगाया जाता है, और विचारण के दौरान जब उसे जमानत पर छोड़ दिया जाता है तब

◼️ यदि वह व्यक्ति बिना पर्याप्त कारण के न्यायालय में उपस्थिति होने में असफल रहता है तब उसे भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 229A के अधीन दण्डित किया जायेगा।

◼️ अध्याय 12 : सिक्कों और सरकारी स्टांपो से संबंधित अपराध
SEC 230 TO 263A 
भारतीय दण्ड संहिता, 1860 का अध्याय XII धारा 230 से धारा 263A तक सिक्कों और सरकारी स्टाम्पों से सम्बन्धित अपराधों के विषय में उपबंध करता है।

Question 1 ‘ सिक्का को परिभाषित कीजिये ।

◾ तत्समय धन के रूप में उपयोग में लाने हेतु किसी राज्य या सम्प्रभु शक्ति के प्राधिकार द्वारा स्टांपित व प्रचलित धातु है ।

धारा 230 ]

Question 2 ‘ क ‘ कुछ कूटकृत्य रुपये ‘ ख ‘ को माल के बदले में देता है । ‘ ख ‘ उन रुपयों को कूटकृत्य जानते हुए प्राप्त करता है । ‘ ख ‘ को रुपये प्राप्त करने के पश्चात् पता चलता है कि वे रुपये कूटकृत्य है और वह उनको इस प्रकार चलाता है मानो वे असली हों । क्या ‘ ख ‘ ने कोई  अपराध किया है ? यदि हां तो कौनसा ?

◾ ‘ ख ‘ ने सिक्कों से सम्बन्धित अपराध अन्तर्गत धारा 241 , भा.दं.सं. कारित किया ।

Question 3. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 230 के अनुसार ‘भारतीय सिक्का’ में सम्मिलित हैं ?

(a) कौड़ियाँ
(b) कम्पनी का रुपया
(c) फरुखाबाद रुपया
(d) (b) तथा (c) दोनों ☑️

◼️ भारतीय दण्ड संहिता का 1860 की धारा 230 में “सिक्का” तथा “भारतीय सिक्का” को परिभाषित किया गया है।

◼️ धारा 230 पैरा 2 के अनुसार भारतीय सिक्का धन के रूप में उपयोग में लाये जाने के लिए भारत सरकार के प्राधिकार द्वारा स्टाम्पित और प्रचालित धातु हैं और इस प्रकार स्टाम्पित और प्रचलित धातु इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए भारतीय सिक्का बनी रहेगी,

👉 यद्यपि धन के रूप में उसका में लाया जाना बंद हो गया हो।

👉 धारा 230 के दृष्टान्त (d) एवं (e) के अनुसार कम्पनी का रुपया तथा फरूखाबाद रूपया “भारतीय सिक्का” है।

Question 4. सिक्का का कूटकरण किस धारा में अपराध है ?

( A ) धारा 230
( B ) धारा 231 ☑️
( C ) धारा 232
( D ) धारा 237

Question 5. जो कोई भी कूटकरण करता है अथवा जान-बूझकर भारतीय सिक्कों (मुद्रा) के कूटकरण की प्रक्रिया का कोई कार्य करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 232 के अंतर्गत कौन-सा दंड दिया जा सकता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 232 के अनुसार, जो कोई भारतीय सिक्के का कूटकरण करेगा या जानते हुए भारतीय सिक्के के कूटकरण के प्रक्रिया के किसी भाग को करेगा,

◼️ वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक होगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत भारतीय सिक्के के कूटकरण हेतु उपकरण बनाने या बेचने के अपराध के लिये दण्ड है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा-234 के अनुसार जो कोई भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाएगा, बेचेगा या रखेगा

◼️ वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

Question 7. जो कोई किसी कूटकृत सिक्के को यह जानते हुये कि वह कूटकृत है भारत में आयात करेगा वह भा.दं.वि. की धारा…….. के अंतर्गत दोषी है।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 237 के अनुसार जो कोई किसी कूटकृत सिक्के का यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह कूटकृत है, भारत में आयात करेगा या भारत से निर्यात करेगा,

◼️ वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 8. एक व्यक्ति सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित एक स्टाम्प का कूटकरण करता है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अधीन वह दण्डित होगा ?

◼️ यदि कोई व्यक्ति राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित एक स्टाम्प का कूटकरण करता है तो उसे भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 255 के अधीन दण्डित किया जायेगा।

◼️ धारा 255 के अनुसार, जो कोई सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचालित किसी स्टाम्प का कूटकरण करेगा या जानते हुए उसके कूटकरण की प्रक्रिया के किसी भाग को करेगा

👉 वह आजीवन कारावास से या दोनों से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डित किया। जायेगा।

◼️◼️अध्याय 13 : बाटों और मापों से संबंधित अपराधों के विषय में + अध्याय 14 लोक स्वास्थ्य , क्षेम , सुविधा , शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में

SEC 264 TO 280

Question 1. लोक उपताप से क्या अभिप्रेत है ? समझाइए

लोक न्यूसेंस को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 268 में परिभाषित किया गया है जिसके अनुसार

◼️ परिभाषा – ” वह व्यक्ति लोक न्यूसेंस का दोषी होगा जो कोई ऐसा कार्य करता है या किसी ऐसे लोप का दोषी है जिसने लोक को या जन साधारण को जो आस – पास में रहते हों या आस – पास की सम्पत्ति पर अधिभोग रखते हों ,

◼️ कोई सामान्य क्षति , संकट या क्षोभ कारित हो या जिसमें उन व्यक्तियों का , जिन्हें किसी लोक अधिकार को उपयोग में लाने का मौका पड़े क्षति , बाधा , संकट या क्षोभ करत होना अवश्यम्भावी हो । “

👉 कोई सामान्य न्यूसेंस इस आधार पर माफी योग्य नही है कि उससे कुछ सुविधा या भलाई कारित होती है ।

उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार लोक न्यूसेंस के अपराध को गठित होने के लिए निम्नलिखित तत्व स्थापित किया जाना आवश्यक है –

( 1 ) किसी कार्य का किया जाना अथवा कार्य करने में अवैध लोप करना ;

( 2 ) ऐसे कार्य या लोप के परिणामस्वरूप

( i ) जन सामान्य को या पास – पड़ोस के रहने वाले या सम्पत्ति धारण करने वाले जन सामान्य को सामान्य क्षति , खतरा या असुविधा हुई हो ; या

( ii ) उन व्यक्तियों को आवश्यक रूप से क्षति , बाधा , संकट या क्षोभ कारित हो जो वहाँ किसी लोक अधिकार के उपयोग का अवसर प्राप्त कर सकते हैं ।

Question 2. भारतीय दण्ड संहिता में उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलाना सम्भाव्य हो उपबंधित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 269 में उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना सम्भाव्य हो उपबंधित है

◼️ जिसके अनुसार जो कोई विधिविरूद्ध रूप से या उपेक्षा से ऐसा कोई कार्य करेगा, जिससे कि और जिससे वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि, जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य है

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Question 3. परिद्वेषपूर्ण और विद्वेषपूर्ण पर्यायवाची शब्द है। भारतीय दण्ड संहिता का एक ही प्रावधान दोनों पर लागू होता है। सही उत्तर का चयन कीजिये-

(a) Section 153 / धारा 153
(b) Section 270/ धारा 270 ◼️
(c) Section 219 / धारा 219
(d) Section 220 / धारा 220

◼️ परिद्वेषपूर्ण और विद्वेषपूर्ण पर्यायवाची शब्द है। भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 270 का उपबन्ध दोनों पर लागू होता है।

◼️ धारा 270 के अनुसार, जो कोई परिद्वेष से ऐसा कोई कार्य करेगा जिससे कि, और वह जानता या विश्वास करने का कारण रखता हो कि, जीवन के लिए संकटपूर्ण किसी रोग का सक्रमण फैलना सम्भाव्य है,

👉 वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 3. विक्रय के लिए आशयित खाद्य एवं पेय का अपमिश्रण किस धारा के अन्तर्गत अपराध है ?

◼️ धारा 272 में ।

Question 4. अपमिश्रित औषधियों का विक्रय की धारा है ?

◼️ धारा 275

Question 5. एक जलाशय के किनारे पर अवस्थित होटल, आपत्ति किये जाने के उपरांत भी अपने दूषित जल को जलाशय में छोड़ रहा है, जिससे जलाशय का पानी कलुषित हो रहा है। होटल व्यवस्थापक को भारतीय दण्ड संहिता में किस अपराध से आरोपित किया जा सकता है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 277 पर आधारित है।

◼️ धारा 277 के अनुसार, जो कोई लोक जल स्रोत या जलाशय के जल को स्वेच्छा से इस प्रकार भ्रष्ट या कलुषित करेगा कि वह उस प्रयोजन के लिए जिसके लिए वह मामूली तौर पर उपयोग में आता हो, कम उपयोगी हो जाय,

👉 वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि तीन मास तक हो सकेगी या जुर्माने से जो 500 रुपये तक हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 6. एक व्यक्ति एक हाथ से सड़क पर लहराते हुए स्कूटर चलाता है उसका अपराध एवं दंड है ?

◼️ धारा 279

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 के धारा 279 के अन्तर्गत अपराध के गठन हेतु निम्न आवश्यक तत्व होने चाहिए-

• गाड़ी चलाना .
• सार्वजनिक मार्ग पर
• ऐसा वाहन उपेक्षा या उतावलेपन से चलाना
• मानव जीवन को संकट उत्पन्न या उपहति या क्षति होना।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 279 में लोक मार्ग पर उतावलेपन से या उपेक्षा से कोई वाहन चलायेगा या सवार होकर हांकेगा जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाय या किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो

👉 वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 6 माह तक हो सकेगी या जुर्माने से जो एक हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जायेगा।◼️◼️अध्याय 14 लोक स्वास्थ्य , क्षेम , सुविधा , शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में

SEC 281 TO 298

Question 1. भा.दं.सं. की निम्नलिखित किस धारा से हिकलिन का नियम सम्बन्धित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 292 हिकलिन का नियम से संबंधित है।

◼️ धारा 292 अश्लील पुस्तकों, रेखाचित्रों, रंगचित्र इत्यादि के विक्रय को दण्डनीय अपराध बनाता है।

Question 2. अ’, एक अंधे व्यक्ति को अश्लील पत्रिका विक्रय करने के लिए भा. दं. सं. की धारा 292 के तहत आरोपित किया गया, उसका बचाव था कि उसे वह जानकारी नहीं थी कि जो पत्रिका उसने विक्रय की वह अश्लील थी-

(a) तथ्य की भूल के कारण ‘अ’ सफल होगा
(b) ‘अ’ असफल होगा ◼️
(c) न्यायालय का विवेकाधिकार है
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

👉 प्रस्तुत समस्या में अ द्वारा लिया गया बचाव कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि जो पत्रिका उसने विक्रय की वह अश्लील थी, का बचाव नहीं मिलेगा क्योंकि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 292 के तहत यह कृत्य अपराध है। अ असफल होगा क्योंकि विधि की भूल भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत बचाव नहीं है।

Question 3. ‘क’, ‘ख’ को, जो 19 वर्ष का युवक है, एक काम्पैक्ट डिस्क (सी.डी.), अश्लील तस्वीरें आमोदार्थ देखने के लिये बाँटता है। ‘क’ ने भारतीय दण्ड संहिता की  किस धारा के अन्तर्गत अपराध किया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 293 के अधीन तरुण व्यक्तियों को अश्लील वस्तुओं का विक्रय प्रतिबन्धित  है।

◼️ धारा 293 के अनुसार, जो कोई बीस वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को कोई ऐसी अश्लील वस्तु बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरण करेगा, प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसा करने का प्रस्थापना या प्रयत्न करेगा,

👉 प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी और 2000/- रु. तक जुर्माना से
👉 तथा द्वितीय दोषसिद्धि पर किसी भाँति के कारावास से जो सात वर्ष तक हो सकेगी तथा 5000/- तक का जुर्माना हो सकेगा।

Question 4. ‘A’ महिला विश्वविद्यालय के गेट के पास खड़ा होकर अश्लील गाने गाता है, उसने कौन-सा अपराध किया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 294 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई किसी ‘लोक-स्थान’ पर कोई अश्लील कार्य करेगा, या कोई अश्लील गाने सुनाएगा या उच्चारित करेगा

👉 जिससे दूसरों को क्षोभ होता हो,

◼️ वह कारावास से जिसकी अवधि 3 मास तक हो सकती है, या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा।◼️◼️ अध्याय 16 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

SEC 299 TO 311

Question 1. अपराधिक मानव वध के आवश्यक तत्व क्या है

अपराधिक मानव वध के आवश्यक तत्व निम्नलिखित हैं: 

• एक व्यक्ति की मृत्यु होनी चाहिए; 
• मृत्यु किसी अन्य व्यक्ति के कार्य के कारण होनी चाहिए; तथा
• मृत्यु का कारण बनने वाला कार्य निम्नलिखित कारणों के द्वारा किया जाना चाहिए: 

👉 हत्या करने के इरादे के साथ; या 
👉 शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे से, जिसमें मौत कारित करने की संभावना हो सकती है; या 
👉 इस ज्ञान के साथ कि इस तरह के कार्य से मृत्यु होने की संभावना है।

Question 2. अपराधिक मानव वध और हत्या के बीच अंतर संक्षिप्त में स्पष्ट करें

◼️ स्टेट ऑफ़ ए.पी.बनाम रायवरप्पु पुन्नया (1977) के ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने इन दोनो के बीच प्रमुख अंतरों को समझने के लिए एक तुलना तालिका (टेबल) बनाई थी, जो इस प्रकार है:

◼️ अपराधिक मानव – धारा 299 आई.पी.सी.

◾एक व्यक्ति अपराधिक मानव वध करता है यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु हुई है वह –

🔘 इरादा:

मौत कारित करने के इरादे से; या शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे से किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु होने की संभावना है; या

🔘 ज्ञान:

यह जानकर कि उसके कार्य से मृत्यु होने की संभावना है।

◼️ हत्या – धारा 300 आई.पी.सी.

◾कुछ अपवादों के अधीन अपराधिक मानव वध हत्या है यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु हुई है, वह-

🔘 इरादा:

यदि कोई कार्य मौत कारित करने के इरादे से; या शारीरिक चोट पहुँचाने के इरादे से किया गया जिसे अपराधी जानता है कि उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाएगी जिसे नुकसान पहुँचाया गया है; या किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुँचाने के इरादे से और शारीरिक चोट पहुँचाने का इरादा प्रकृति के सामान्य क्रम में मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त है, या

🔘 ज्ञान:

इस ज्ञान के साथ कि उसका कार्य इतना तत्काल हानिकारक है कि इसका लगभग निश्चित रूप से मृत्यु या शारीरिक चोट का परिणाम होगा जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो सकती है और बिना किसी औचित्य या मृत्यु या चोट के जोखिम के कारण ऊपर वर्णित है।

Question 3. ‘क’, ‘ग’ को यह सोचते हुए कि वह ‘ख’ है, मार डालता है। ‘क’ किस धारा के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध का दोषी है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 301 के अनुसार, “जिस व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मृत्यु करके आपराधिक मानव वध करे”

◼️ तो अपराधी द्वारा किया गया आपराधिक मानव वध उस भांति का होगा, जिस भांति का वह होता, यदि वह उस व्यक्ति की मृत्यु कारित करता जिसकी मृत्यु कारित करना उसके द्वारा आशयित था या वह जानता था कि उसके द्वारा उसकी मृत्यु कारित होना संभाव्य है।

👉 “विद्वेष अन्तरण का सिद्धान्त” धारा 301 से ही सम्बन्धित है। जिसको ट्रान्सफर ऑफ मैलिस का सिद्धान्त कहा जाता है।

Question 4. ‘ए’ एवं ‘बी’ तलवार धारण कर एक्स के मकान में उसकी हत्या कर देने के आशय सहित गए। ‘ए’, एक्स पर हमला करता है और उसकी मृत्यु कारित कर देता है। भा.दं.सं. की धारा जिसके अंतर्गत अपराध का ‘बी’ दोषी है ?

◼️ प्रस्तुत प्रश्न में A तथा B दोनों हत्या करने के आशय से तलवार धारण करके मकान में गये हैं अतः वे यहां सामान्य आशय को अग्रसारित कर रहे हैं

◼️ और भा0दं०सं० 1860 की धारा 34 के अनुसार सामान्य आशय को अग्रसर करने में सभी व्यक्तियों द्वारा या किसी एक व्यक्ति द्वारा किये गये किसी कार्य के लिए सभी व्यक्ति उसी प्रकार उत्तरदायी होते हैं, मानो वह कार्य अकेले उसी ने किया हो। |

👉 अतः A तथा B दोनों धारा 302 सपठित धारा 34 के दोषी हैं।

Question 5. भारतीय दण्ड संहिता के किस प्रावधान के अन्तर्गत “उतावलेपन और उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु कारित करने” का उल्लेख है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304A उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करने से सम्बन्धित है।

◼️ धारा 304A के अनुसार, जो कोई उतावलेपन से या उपेक्षापूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करेगा, जो कि आपराधिक मानववध की कोटि में नहीं आता,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

👉 भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304-A को 1870 में जोड़ा गया, जिसमें ‘उपेक्षा द्वारा मृत्य कारित करना’ के लिए दण्ड का प्रावधान किया गया है।

Question 6. ‘ दहेज मृत्यु ‘ किसे कहते है ?

◼️ आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 1986 के द्वारा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 304-B जोड़ी गयी। धारा 304-B दहेज मृत्यु से सम्बन्धित है।

◼️ धारा 304-B के अनुसार

👉 जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है
👉 या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है

◼️ और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति ने या उसके पति के किसी नातेदार ने दहेज की किसी मांग के लिए या उसके सम्बन्ध में उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था,

◼️ वहाँ ऐसी मृत्यु को ‘दहेज-मृत्यु’ कहा जायेगा।

◼️ दहेज मृत्यु के लिए कम से कम सात वर्ष तक के कारावास जो कि आजीवन कारावास तक हो सकेगा के दण्ड से दण्डित किया जायेगा।

🔘 कालिया पेरूमल बनाम तमिलनाडु राज्य (2003 SC) के मामले में यह अभिनिर्धारित किया गया था कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304-B और 498 A दोनों ही धाराओं के अधीन आने वाले अपराधों में क्रूरता एक आवश्यक तत्व के रूप में है। दोनों धारायें एक दूसरे में प्रविष्ट ( Inclusive) नहीं है, किन्तु दोनों सुभिन्न रूप से पृथक अपराध हैं।

Question 7. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में आत्म हत्या का दुष्प्रेरण परिभाषित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 306 आत्महत्या के दुष्प्रेरण को परिभाषित करती है तथा दण्ड का उपबंध करती है।

◼️ धारा 306 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करे, तो जो कोई ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 8. मि. सोहन एक कोमल वय के शिशु की मृत्यु कारित करने के आशय से उसे एक निर्जन स्थान में छोड़ देता है। भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में वह उत्तरदायी होगा ?

◼️ प्रस्तुत समस्या धारा 307 के दृष्टात (b) पर आधारित है।

◼️ किसी कोमल वय के शिशु को मृत्यु कारित करने के आशय से एक निर्जन स्थान पर छोड़ देना भारतीय दण्ड संहिता कि धारा 307 के तहत ‘हत्या करने का प्रयत्न’ का अपराध गठित होता है।

Question 9. ‘ क ‘ गंभीर और अचानक प्रकोपन पर ऐसी परिस्थितियों में ‘ य ‘ पर पिस्तौल चलाता है कि यदि तद्द्वारा वह मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध का दोषी होता ।
‘ क ‘ को ,किस अपराध में सजा देनी चाहिये – हत्या करने के प्रयत्न में अथवा आपराधिक मानव वध करने के प्रयत्न में ? 

◾’ क ‘ को आपराधिक मानव वध करने के प्रयत्न नामक अपराध हेतु दण्डादेश दिया जाना चाहिये ।

धारा 308 – दृष्टांत ( A ) ]

Question 10. किस अपराध में वास्तविक अपराध के होने पर दण्ड नहीं दिया जाता परन्तु ऐसा प्रयास करने के लिए दण्ड दिया जाता है ?

(a)जब हत्या करने का प्रयास विफल हो जाए
(b) गर्भपात कारित करना
(c) आत्महत्या ☑️
(d) बच्चे को परित्याग के आशय से प्रकट करना

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 309 में ‘आत्महत्या के प्रयत्न’ के लिए दण्ड के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है।

इस धारा के अनुसार जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा और उस अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माना से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।”

◼️ आत्महत्या का प्रयत्न एक ऐसा अपराध है, जो यदि वास्तविक रूप से कारित जाए अर्थात् प्रयत्न करने वाले की मृत्यु हो जाए, तो उस दण्डित नहीं किया जा सकता है।

🔘 पी.रतिनाम बनाम भारत संघ (1994 SC) के वाद में न्यायालय ने धारित किया कि धारा 309 संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का अतिक्रमण करने के कारण असंवैधानिक है। न्यायालय ने आगे यह भी कहा कि इस धारा को अब संहिता से निकाल दिया जाना चाहिए।

परन्तु ज्ञान कौर बनाम पंजाब राज्य | ( 1996 SC) के वाद में न्यायालय ने अपने पूर्व निर्णय को उलटते हुए निर्णय दिया कि धारा 309 संवैधानिक है तथा जीने के अधिकार में मरने का अधिकार शामिल नहीं है।

अरूणा रामचन्द्र शानबाग बनाम भारत संघ (2011 SC) का वाद इच्छा मृत्यु से सम्बन्धित है।

Question 11. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा में ‘ठग’ को परिभाषित किया गया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 310 ‘ठग’ को परिभाषित करती है।

◼️ इस धारा के अनुसार,

👉 जो कोई इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात किसी समय हत्या द्वारा या हत्या सहित लूट या शिशुओं की चोरी करने के प्रयोजन के लिए अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों से अभ्यासतः, सहयुक्त रहता है, वह ठग है।

👉 धारा 311 के अनुसार, जो कोई ठग होगा, वह आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

◼️◼️अध्याय 16 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

SEC 312 TO 338

Question 1. अ एक लड़की के जीवित जन्म लेने से रोकने के लिए गर्भपात कारित करता हैं । इसके लिए भारतीय दण्ड संहिता के तहत कितना दण्ड होगा ?

◾ तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों

◾यदि वह स्त्री स्पन्दनगर्भा हो तो सात वर्ष तक का कारावास और जुर्माना ।

धारा 312 ]

Question 2. गर्भपात करवाने के इरादे से हुई मृत्यु के संदर्भ में किस धारा के तहत निपटा जा सकता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 314 गर्भपात कारित करने के आशय से किये गये कार्यों द्वारा कारित मृत्यु के सम्बन्ध में प्रावधान करती है।

◼️ इस धारा के अनुसार जो कोई गर्भवती स्त्री का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसा कार्य करेगा, जिससे ऐसी स्त्री की मृत्यु कारित हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 3. अत्यन्त गरीबी के कारण तीन मास की एक पुत्री को उसके निर्जन जंगल में अरक्षित स्थिति में सदा के लिये छोड़कर पुनः अपने घर लौट आते हैं । उन्होंने कौनसा अपराध किया ?

◾आरोपी माता व पिता ने अपनी 12 वर्ष से कम आयु की पुत्री को उक्त स्थिति में निर्जन जंगल में अरक्षित परित्याग करने का अपराध कारित किया ।

धारा 317 ]

Question 4. ‘उपहति’ को परिभाषित कीजिए ?

◾धारा 319 के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति को

• शारीरिक पीड़ा
• रोग या अंग शैथिल्य कारित करता है ,

वह उपहति करता है यह कहा जाता है ।

Question 5. किसी स्त्री के केश पकड़कर उसे खींचना किस अपराध का गठन करता है ?

◾ उपहति के अपराध का ( शारीरिक पीड़ा ) 

Question 6. धारा 320 के अनुसार- घोर उपहति क्या है ?

◾उपहति की केवल नीचे लिखी 8 किस्में घोर कहलाती हैं

1. पुंसत्वहरण ।

2. दोनों में से किसी भी दृष्टि का स्थाई विच्छेद ।

3. दोनों में से किसी भी कान की श्रवण शक्ति का स्थाई विच्छेद ।

4. किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद ।

5. किसी भी अंग या जोड़ की शक्तियों का नाश या स्थाई ह्रास ।

6. सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपीकरण ।

7. अस्थि या दांत का भंग या विसंधान में

8. कोई उपहति जो जीवन को संकटापन्न करती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा रहता है या अपने मामूली कामकाज को करने के लिए असमर्थ रहता है ।

Question 7. स्वेच्छया गंभीर चोट पहुँचाने की परिभाषा किस धारा में दी गई है ?

◼️ धारा-322 में स्वेच्छा घोर उपहति कारित करने को परिभाषित किया गया है। धारा-322 के अनुसार-

जो कोई स्वेच्छा उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है, घोर उपहति है और यदि वह उपहति जो वह कारित करता है, घोर उपहति हो, तो वह ‘स्वेच्छया घोर उपहति करता है’ यह कहा जाता है।

Question 8. कोई झपटमार किसी महिला की नाक काटता है और घोर उपहति कारित करता है और बाद में उस महिला की मृत्यु हो जाती है, उसने कौन-सा अपराध, यदि कोई हो, किया है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या में अभियुक्त भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 325 के तहत गम्भीर प्रकृति की घोर उपहति स्वेच्छा कारित करने का दायी होगा,

◼️ क्योंकि न तो अभियुक्त ने मृत्यु कारित करने के आशय से कार्य किया और न ही चोट मामूली अनुक्रम में मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त है।

👉 धारा 325 के अनुसार, जो कोई स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 9. धारा 326- ख के अंतर्गत ‘ अम्ल ‘ से क्या तात्पर्य है ?

◾धारा 326- ख के स्पष्टीकरण -1 के अनुसार –

•अम्ल में शामिल है ऐसा पदार्थ जो अम्लीय या संक्षारक रूप या ज्वलन प्रकृति का है ,

•जो शारीरिक क्षति करने योग्य है , जिससे क्षतिचिन्ह बन जाते हैं

• या विद्रूपता या अस्थायी या स्थायी निःशक्तता हो जाती है ।

Question 10. एक पुलिस अधिकारी ‘ए’, ‘बी’ को यह बताने के लिए यातना देता है कि उसने चोरी की हुई संपत्ति कहाँ जमाकर रखी है। यहां ‘ए’ जिस धारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है, वह है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भारतीय दण्ड संहिता की धारा 330 के दृष्टांत (b) पर आधारित है।

◼️ धारा 330 के अनुसार जो कोई संस्वीकृति उद्यापित करने या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वच्छेया से उपहति कारित करेगा,

◼️ वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगा तथा जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा।

◼️◼️अध्याय 16 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

SEC 339 TO 358

Question 1. सदोष अवरोध तथा सदोष परिरोध में अन्तर स्पष्ट करें ?

1.सदोष अवरोध – धारा 339 एवं एवं सदोष परिरोध 340

2. सदोष अवरोध में एक ही दिशा में जाना बाधित रहता है जबकि सदोष परिरोध में सभी दिशाओं में 1 .

3. सदोष अवरोध आंशिक अवरोध है जबकि सदोष परिरोध में स्वतन्त्रता पूर्ण रूप से बाधित हो जाती है ।

4. सदोष परिरोध में सदोष अवरोध निहित है । सदोष परिरोध सदोष अवरोध का एक प्रकार है ।

5. सदोष परिरोध में जहां एक निश्चित सीमा सदैव आवश्यक होती है वहीं सदोष अवरोध में यह आवश्यक नहीं ।

◾ 6दंड

धारा 341 सदोष अवरोध – सादा कारावास एक मास तक या जुर्माना ₹500 या दोनों

धारा 342 सदोष परिरोध – किसी भी भाति का कारावास 1 वर्ष तक या जुर्माना ₹1000 या दोनों

Question 2. आपराधिक बल ( criminal force ) और हमला ( assault ) पर टिप्पणी लिखिये ।

🔘 आपराधिक बल ( criminal force )

◾ जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति पर उस व्यक्ति की सहमति के बिना, अपराध करने के लिए और उस व्यक्ति को चोट, भय या झुंझलाहट (एनॉयंस) के रूप में नुकसान पहुंचाने के पूर्व इरादे से बल का प्रयोग करता है, तो इसे दूसरे व्यक्ति पर आपराधिक बल का उपयोग करना कहा जाता है।

👉 यह भारतीय दंड संहिता (इंडियन पीनल कोड) की धारा 350 के अंदर आता है।

उदाहरण – किसी स्त्री का घूघट साशय हटा देना , कुत्ते को झपटने के लिये भड़काना , साशय धक्का देना और किसी व्यक्ति के शरीर पर उबलते हुए पानी को फेंकना इसे अपराध की कोटि में आते हैं ।

[ धारा 350 ]

🔘 हमला ( assault )

जो कोई , कोई अंगविक्षेप ( gesture ) या कोई तैयारी इस आशय से करता है , या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे अंगविक्षेप या ऐसी तैयारी करने से किसी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका हो जाएगी कि जो वैसा अंगविक्षेप या तैयारी करता है , वह उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने ही वाला है , वह “हमला” करता है , यह कहा जाता है ।

सामान्य शब्दों में ( जब किसी व्यक्ति को कोई इशारा किया जाता है, यह जानते हुए कि व्यक्ति उसे पकड़ने जा रहा है क्योंकि वह व्यक्ति उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने जा रहा है, उसे हमला कहा जाता है। केवल शब्दों में हमला नहीं होता है। लेकिन एक व्यक्ति कुछ इशारों और भावों या तैयारी का उपयोग कर सकता है, ऐसे इशारों, भावों और तैयारियों पर हमला हो सकता है )

◾ उदाहरण – किसी व्यक्ति पर अपराधी द्वारा मुक्का तानना वार करने के लिये छड़ी तानना और हिंसक कुत्ते से आक्रमण कराने हेतु खोलना हमला करने के दृष्टांत है । केवल शब्द कहना हमले की परिधि में नहीं आता ।

धारा 351 ]

Question 3.  जब ‘ क ‘ उद्योगपति की फैक्ट्री पर ‘ ख ‘ आयकर निरीक्षक बहीखातों आदि की जांच हेतु प्रवेश करता है एवम् अपना परिचय – पत्र और प्रयोजन बताता है , तब ‘ अ ‘ उसको धकेल कर वहां से बाहर कर देता है । ‘ क ‘ किस अपराध का दोषी है ?

◾’ क ‘ , ख लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन के दौरान भयोपरत करने के आशय से निजी शारीरिक शक्ति द्वारा आपराधिक बल का प्रयोग करने का दोषी है ।

धारा 353 ]

Question 4. कॉलेज परिसर से बाहर निकलते समय ‘ क ‘ अपनी महिला क्लास फेलो ‘ ख ‘ का जबरदस्ती चुम्बन लेकर कौनसा अपराध करता है ?

◾ ‘ क ‘ अपनी महिला क्लासफेलो ‘ ख ‘ की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर आपराधिक बल का प्रयोग करने का अपराध करता है ।

धारा 354 ]

Question 5. किसी स्त्री से लैंगिक अनुग्रह के लिए मांग या अनुरोध भारतीय दण्ड संहिता 1860 में दण्डनीय अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354A के अन्तर्गत किसी स्त्री से लैंगिक अनुग्रह के लिए मांग या अनुरोध करना लैंगिक उत्पीड़न का अपराध गठित करता है।

👉 धारा 354B विवरण करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग ।

Question 6. सी ने बी की पत्नी रहते हुए सक्षम न्यायालय से पृथक्करण की डिक्री प्राप्त कर ली है, परन्तु वे अभी भी एक ही परिसर में रह रहें हैं। बी, सी के साथ संभोग करता है। ए, जो कि उनका पड़ौसी है, यह कृत्य देखता है और एक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाता है। निम्नलिखित परिस्थितियों में कौन सा अपराध घटित हुआ है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या में ‘A’ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354-C के प्रभाव से दृश्यरतिकता के अपराध का दोषी होगा।

◼️ प्रस्तुत समस्या में A का कृत्य दृश्यरतिकता के अपराध का गठन करता है। A प्राइवेट कृत्य में लगी स्त्री को देखता है और F.I.R. कर उसके (C एवं D) के कृत्य का प्रकाशन करता है अतः वह दृश्यरतिकता का अपराध करता है।

👉 दण्ड विधि संशोधन अधिनियम 2013 द्वारा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 के पश्चात् धारा 354A, 354B, 354C, 354D को जोड़ा गया जो कि निम्नवत् हैं-

(i) 354 A – लैंगिक उत्पीड़न और लैंगिक उत्पीड़न के लिए दण्ड
(ii) 354B – विवरण करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
(iii) 354 C- दृश्यरतिकता
(iv) 354 D पीछा करना

Question 7. ‘ए’ और ‘बी’ अच्छे दोस्त हैं, ‘ए’ ‘बी’ से शादी का प्रस्ताव करता है किंतु ‘बी’ इंकार कर देती है, ‘ए’ यह संदेह करता है कि ‘बी’ का प्रेम संबंध किसी अन्य से है। और ‘ए’, ‘बी’ द्वारा उपयोग करने वाले मोबाईल फोन और ई-मेल अकाउंट मॉनिटर करता है, ‘ए’ द्वारा कौन सा अपराध किया गया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354-D पीछा करना’ (Stalking) से सम्बन्धित है। धारा 354-D के अनुसार, ऐसा कोई पुरुष जो

◼️ (i) किसी स्त्री का उससे व्यक्तिगत अन्योन्य क्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस स्त्री द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किये जाने के बावजूद बार-बार पीछा करता है और संपर्क करता है। या संपर्क करने का प्रयत्न करता है,

👉 (ii) जो कोई स्त्री द्वारा इंटरनेट, इमेल या किसी अन्य प्रारूप की इलेक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किये जाने को मानीटर करता है, पीछा करने का अपराध करता है।

Question 8. भारतीय दंड संहिता, 1860 के किस प्रावधान अंतर्गत संपत्ति की चोरी के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग दंडनीय है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 356 के अन्तर्गत सम्पत्ति के चोरी के प्रयत्न में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग दण्डनीय है।

◼️ धारा 356 के अनुसार “जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग किसी ऐसी सम्पत्ति के चोरी करने के प्रयत्न में करेगा जिसे वह व्यक्ति उस समय पहने हुए है या ले जा रहा हो,

👉 वह दोनो में से किसी भी प्रकार के कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनो से दण्डित किया जायेगा।◼️◼️अध्याय 16 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

SEC 359 TO 370 A

Question 1. संहिता में व्यपहरण के कौन से दो प्रकार हैं ?

◼️ धारा 359 के अनुसार व्यपहरण दो किस्म का होता है
1. भारत में से व्यपहरण और
2. विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण है

Question 2. भारत में से व्यपहरण क्या है ?

◼️ धारा 360 के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति का , उस व्यक्ति की , या उस व्यक्ति की ओर से सम्मति देने के लिए वैध रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति की सम्मति के बिना ,

◼️ भारत की सीमाओं से परे प्रवहण कर देता है , वह भारत में से उस व्यक्ति का व्यपहरण करता है , यह कहा जाता है ।

Question 3.  विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण के आवश्यक तत्व क्या है ?

1. किसी अवयस्क या विकृतचित्त व्यक्ति को ले जाना अथवा बहका ले जाना

2. ऐसा अवयस्क , व्यक्ति पुरुष की दशा में 16 वर्ष से कम एक स्त्री की दशा में 18 वर्ष से कम उम्र की या का हो

3. ले जाना या बहका ले जाना ऐसे अवयस्क या विकृतचित्त व्यक्ति के विधिपूर्ण संरक्षक की संरक्षकता में से किया गया हो ।

4. ऐसा ले जाना या बहका ले जाना संरक्षक की सहमति के बिना हुआ है ।

धारा 361 ]

Question 4. जब कोई व्यक्ति किसी 17 वर्षीय लड़के को फुसलाकर या अन्यथा ले जाता है तब उसने कौन सा अपराध किया है ?

◼️ अपहरण का ।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 362 में अपहरण के अपराध को परिभाषित किया गया है जिसके अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बल द्वारा विवश करता है या किन्ही प्रवचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता, वह व्यक्ति अपहरण करता है, यह कहा जाता है। |

👉 अतः परिभाषा से स्पष्ट है कि अपहरण का अपराध वयस्क या अवयस्क किसी के प्रति किया जा सकता है।

Question 5. व्यपहरण और अपहरण में अन्तर स्पष्ट कीजिये ।

◼️ व्यपहरण

( 1 ) दो प्रकार का होता है , प्रथमतः भारत से और द्वितीयतः विधिपूर्ण संरक्षता से ।

( 2 ) यह अपराध विधिपूर्ण संरक्षक की विधिपूर्ण संरक्षकता के विरूद्ध होता है ।

( 3 ) व्यपहरणकर्ता के आशय का विधिक महत्व ( नगण्यमान है ।

( 4 ) व्यपहरण ज्यादातर व्यपहृत व्यक्ति को बहला – फुसला कर किया जाता है ।

( 5 ) एक बार में ही यह अपराध सम्पूर्ण हो जाता है ।

( 6 ) व्यपहृत व्यक्ति की सम्मति महत्वहीन है ।

( 7 ) यह अपराध अवयस्क या विकृतचित्त व्यक्ति से सम्बन्धित होता है ।

◼️ अपहरण

( 1 ) इसकी कोई किस्में नहीं होती है ।

( 2 ) यह अपराध स्वयं अपहृत व्यक्ति के विरूद्ध होता है ।

( 3 ) अपहरणकर्ता के आशय का अत्यन्त विधिक महत्व है ।

( 4 ) अपहरण में अपहृत व्यक्ति को बाध्य / विवश या उत्प्रेरित , बल या प्रवंचना आदि से किया जाता है ।

( 5 ) यह एक निरन्तर जारी रहने वाला अपराध है ।

( 6 ) अपहृत व्यक्ति की स्वतन्त्र सम्मति होने की दशा में यह अपराध कारित नहीं होता है ।

( 7 ) इसमें आयु व चित्तविकृति अप्रासंगिक होते

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में ‘भीख माँगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का  व्यपहरण या विकलांगीकरण” को वर्णित किया गया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 363-A “भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यवहरण या विकलांगीकरण” का प्रावधान करती है।

◼️ धारा 363-A की उपधारा (4) (b) के अनुसार अप्राप्तवय से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो

(1) यदि नर है, तो सोलह वर्ष से कम आयु का है, तथा
(2) यदि नारी है, तो अठारह वर्ष से कम आयु की है।

👉 अतः धारा 363-A के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय से क्रमशः नर सोलह वर्ष एवं नारी अठारह वर्ष अभिप्रेत है।

Question 7. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में फिरौती के लिए व्यपहरण का उपबंध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 364A में फिरौती आदि के लिए व्यपहरण का उपबन्ध किया गया है

👉 यह धारा आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम 1993 के द्वारा अन्तः स्थापित किया गया है।

Question 8. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 366-क में किस अपराध का उल्लेख है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 366-A “अप्राप्तवय लड़की का उपापन” के अपराध से सम्बन्धित हैं, जो इस प्रकार है-

👉 जो कोई 18 वर्ष से कम आयु की अप्राप्तवय लड़की को अन्य व्यक्ति से अयुक्त सम्भोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या तद्द्द्वारा विवश या विलुब्ध किया जायेगा,

👉 यह सम्भाव्य जानते हुए ऐसी लड़की को किसी स्थान से जाने को या कोई कार्य करने को, किसी भी साधन द्वारा उत्प्रेरित करेगा,

◼️ वह कारावास से, जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

Question 9. किस उम्र तक की लड़की के भारत से बाहर के किसी देश से आयात करने के अपराध के लिए 10 वर्ष तक के कारवास के दण्ड का विधान है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के धारा 366 B के अनुसार जो कोई 21 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की को भारत के बाहर किसी देश से आयात, उसे किसी अन्य व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या तद्द्द्वारा वह विवश या विलुब्ध की जाएगी, यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा,

◼️ वह कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 10. जो कोई किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह भा.द.सं. की धारा 369 के अंतर्गत दण्डित किया जाएगा, अगर शिशु की आयु………………है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 369 के अनुसार, जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले ले,

◼️ वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 11. व्यक्तियों के दुर्व्यापार का अपराध किस धारा में अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 370 व्यक्तियों के दुर्व्यापार को परिभाषित तथा दण्ड की व्यवस्था करता है।

👉 धारा 370 दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम 2013 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।◼️◼️अध्याय 16 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

SEC 371 TO 377

Question 1. अयुक्त संभोग” का आशय है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 कि धारा 372 के स्पष्टीकरण 2 के अनुसार “आयुक्त संभोग” से इस धारा के प्रयोजनों के लिये ऐसे व्यक्तियों से मैथुन अभिप्रेत है

• जो विवाह से संयुक्त नहीं है,
• या ऐसे किसी संयोग या बंधन से संयुक्त नहीं हैं जो यद्यपि विवाह की कोटि में तो नहीं आता तथापि उस समुदाय की, जिसके वे है,
• या यदि वे भिन्न समुदायों के हैं तो ऐसे दोनों समुदायों की, स्वीय विधि या रूढ़ि द्वारा

👉 उनके बीच में विवाह-सदृश संबंध अभिज्ञात किया जाता हो।

Question 2. “अ” अपनी छात्रा “ब” से विवाह करने का वचन देता है और उसको अपने साथ सहवास करने के लिये। उत्प्रेरित करता है। “अ” ने “ब” को विवाह का झूठा विश्वास दिलाया और कपटपूर्ण विवाह की कुछ रस्में भी की, जिससे “ब” को विश्वास हो गया कि वह “अ” की विधिक तौर पर विवाहित पत्नी थी। बाद में “अ” ने उसको अपनी पत्नी मानने से इन्कार कर दिया । “अ” ने किस प्रकार का अपराध किया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 के चौथे खण्ड के अनुसार उस स्त्री की सम्मति से,

• जबकि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस स्त्री का पति नहीं है
• और उस स्त्री ने सम्मति इसलिए दी है कि वह विश्वास करती है कि वह ऐसा पुरुष है जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है।

👉 ‘अ’ अपनी छात्रा ‘ब’ से विवाह करने का वचन देता है और उसको अपने सहवास करने के लिए उत्प्रेरित करता है

👉 “अ” ने “ब” को विवाह का झूठा विश्वास दिलाया और कपटपूर्ण विवाह की कुछ रस्मे भी की, जिससे “ब” को विश्वास हो गया कि वह “अ” की विधिक विवाहित पत्नी थी और इस भ्रम के अधीन उसने ‘अ’ को सहवास की सम्मति दी

👉 किन्तु ‘अ’ यह जानता था कि वह “ब” का पति नहीं है, एवं तत्पश्चात् उसने ‘ब’ को अपनी पत्नी मानने से इन्कार करके उसकी पुष्टि भी कर दी।

◼️ अतः ‘अ’ ने (धारा 375 खण्ड (4) के अनुसार) बलात्कार का अपराध किया है। जिसके लिए वह IPC की धारा 376 के तहत दण्डनीय है।

Question 3. ‘अ’, एक 11 वर्ष का लड़का, लगभग 8 वर्ष की लड़की जो सो रही थी, के कमरे में घुसा व ‘अ’ ने लड़की के गुप्तांगों को क्षति पहुंचाई। इस केस में क्या ‘अ’ किस अपराध का दोषी है ?

◼️ प्रस्तुत मामले में ‘अ’ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 375 में परिभाषित ‘बलात्संग’ का दोषी है,

👉 क्योंकि धारा 375 की परिभाषा में ‘पुरुष’ शब्द को प्रयुक्त किया गया है।

👉 धारा 10 के अनुसार ‘पुरुष’ शब्द किसी भी आयु के मानव नर का द्योतक है।

◼️ संहिता के धारा 83 के अंतर्गत 7 वर्ष से अधिक किन्तु 12 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को सीमित उन्मुक्ति प्रदान की गई है।

◼️ यहां ‘अ’ अपने कार्य को समझता था और सोती हुई स्त्री को सम्मति देने में असमर्थ माना जाता है। अतः ‘अ’ बलात्संग के अपराध का दोषी है।

Question 4. 376 – a में क्या प्रावधानित है ?

◾पीड़िता की मृत्यु या लगातार विकृतशील दशा कारित करने के लिए दंड ।

Question 5. धारा 376 – d में कितना दंड उपबन्धित है ?

◾सामूहिक बलात्संग हेतु दंड धारा 376- घ में 20 वर्ष का कठोर कारावास व जुर्माना उपबन्धित

Question 6. धारा 375 में किसी स्त्री के साथ मैथुन सात परिस्थितियों में बलात्संग गठित करेगा , धारा 375 में बलात्संग के लिए दी गयी परिस्थितियाँ क्या हैं ?

◾1. उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध

◾2. उस स्त्री की सम्मति के बिना ।

◾3. उस स्त्री की सम्मति से जबकि सम्मति मृत्यु या उपहति के भय में डालकर प्राप्त की गयी हो ।

◾4. उस स्त्री की सम्मति से जबकि वह पुरुष के अपना पति होने का विश्वास करती हो , जबकि पुरुष जानता है कि वह उसका पति नहीं है ।

◾5. उस स्त्री की सम्मति से जबकि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किसी जड़िमाकारी पदार्थ के प्रभाव में या मत्तता की स्थिति में देती है ।

◾6. उस स्त्री की सम्मति या बिना सम्मति के जबकि उसकी आयु 16 वर्ष से कम है ।

Question 7. किसी पुरुष का अपनी पत्नी के साथ मैथुन कब होगा ?

◾ जबकि उसकी पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम है ।

Question 8. भारतीय दण्ड संहिता कौन-सी धारा आकर्षित होगी, यदि लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ बलात्संग किया जाता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 376(2)(b) के अनुसार जो कोई लोक सेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक की अभिरक्षा में स्त्री से बलात्संग करेगा,

◼️ वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष से कम नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

👉 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 376-B लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग का प्रावधान करती है। किन्तु दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा इसे धारा 376(2) (ख) में प्रतिस्थापित किया गया।

Question 9. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376-घ के अंतर्गत सामूहिक बलात्संग के लिये अधिकतम दण्ड क्या है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 376D में सामूहिक बलात्कार के लिए दण्ड का उपबन्ध किया गया है। जिसमें दण्ड, कठोर कारावास जो 20 वर्ष से कम नहीं होगी या आजीवन कारावास तक हो सकती है।

👉 इस धारा को आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम 2013 द्वारा जोड़ा गया है।

Question 10. लौंडेबाजी (Buggery) किसके विरुद्ध अपराध है ?

◼️ लौडेंबाजी (Buggery) यौन की प्राकृतिक क्रम के विरूद्ध दुराचारिता के विरूद्ध अपराध है। भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 377 प्रकृति विरूद्ध अपराध का प्रावधान करती है।

◼️ धारा 377 के अनुसार. जो कोई,

(a) किसी पुरुष
(b) स्त्री, या
(c) जीव-जन्तु के साथ

👉 प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इंद्रिया – भोग करेगा वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति की कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

🔘 महत्वपूर्ण वाद

• नॉज फाउन्डेशन बेनाम एन.सी.टी. ऑफ दिल्ली के वाद में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 377 की संविधानिकता को चुनौती दी गयी थी।

• सुरेश कौशल बनाम नाज फाउन्डेशन (2013 SC) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 377 का संवैधानिक घोषित किया।

• नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018 SC) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 377 को आंशिक रूप से असंवैधानिक घोषित किया क्योंकि अब दो समान लिंगियों द्वारा सहमति से किया गया इंद्रिय भोग अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।◼️◼️अध्याय 17 संपति के विरुद्ध अपराध

SEC 378 TO 402

Question 1. चोरी की परिभाषा दीजिए इस अपराध के लिए अधिकतम सजा क्या है ?

◾जो कोई किसी व्यक्ति के ‘कब्जे’ में से
◾उस व्यक्ति की ‘सम्मति’ के बिना
◾कोई ‘जंगम सम्पत्ति’ ‘बेईमानी से’ लेने का ‘आशय’ रखते हुए

👉 वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए ‘हटाता’ है , वह चोरी करता है , यह कहा जाता है ।

◾इस अपराध के लिये अधिकतम सजा तीन वर्ष तक का कारावास अथवा जुर्माना या दोनों है ।

धारा 378 व 379 ]

Question 2. ‘ उद्दापन ‘ को परिभाषित करे

◼️ धारा 383 में ‘ उद्दापन ‘ परिभाषित है , जो इस प्रकार है-

◾” जो कोई किसी व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के भय में साशय डालता है

◾और तद्द्वारा इस प्रकार भय में डाले गये व्यक्ति को कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज , जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके ,

◾किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करता है , वह उद्दापन करता है ।

👉 उद्दापन , चोरी और लूट के बीच का कृत्य है , अर्थात् यदि अभियुक्त सम्पत्ति धारक के कब्जे में से सम्पत्ति या वस्तु उसकी सहमति के बिना ले जाता है , तो यह चोरी का अपराध होगा और यदि वह सम्पत्ति धारक के सामने सम्पत्ति छीनकर ले जाता है तो यह लूट का अपराध होगा ।

👉 परन्तु यदि वह सम्पत्तिधारक व्यक्ति को चोट का भय दिखाकर उसको या अन्य किसी व्यक्ति को सम्पत्ति देने के लिए विवश करता है , तो यह उद्दापन का अपराध कहलाएगा ।

Question 3. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा के अन्तर्गत दुकान से एक कम्प्यूटर की चोरी करना दण्डनीय है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 380 के अनुसार जो कोई ऐसे किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में चोरी करेगा जो निर्माण, तम्बू या जलयान मानव निवास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए, उपयोग में आता हो,

👉 वह 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 4. ‘ छ ‘ ने ‘ ज ‘ का , जो बाजार में सामान खरीद रहीं थी , नेकलेस पकड़ लिया और ताकत से झटका देकर अलग कर दिया । इसके बाद हाथापाई हुई । ‘ छ ‘ को किस अपराध के लिए दण्डित किया जायेगा ?

◾ लूट । – धारा 390

Question 5. लूट का अपराध कारित करने के लिए अभियुक्तों की संख्या कम से कम कितनी – कितनी होनी चाहिए ?

◼️ एक
◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 390 में लूट को परिभाषित किया गया है। इस धारा के अनुसार, सब प्रकार के लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है। अतः लूट के अपराध के लिए न्यूनतम व्यक्तियों की कोई व्याख्या नही की गयी है इसलिये एक व्यक्ति भी लूट कारित कर सकता है।

Question 6. X ने चार सशस्त्र गुण्डों के साथ मिलकर Y के बच्चे को पकड़कर यह धमकी दी कि यदि Y अपनी घड़ी और हीरे की अंगूठी नहीं देगा तो वह बच्चे को मार डालेगा । X के कौन सा अपराध किया ?

◼️ डकैती ।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 391 के अनुसार, जब 5 या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट (धारा 390) करते है या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित है और ऐसी लूट के किये जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते है,

👉 कुल मिलाकर 5 या अधिक है, तब हर व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है या उसका प्रयत्न करता है या उसमें मदद करता है, कहा जाता है कि वह डकैती करता है।

Question 7. एक व्यक्ति को मन्दिर के फर्श पर एक पर्स मिलता है और उसने पर्स उठाकर अपनी जेब में रख लिया , परन्तु कुछ ही समय पश्चात् उसे गिरफ्तार कर लिया गया । क्या उसे आपराधिक दुर्विनियोग के लिए दण्डित किया जाना चाहिए ?

◾वह आपराधिक दुर्विनियोग का दोषी नहीं होगा ,

◾क्योंकि पर्स को उठाकर अपने जेब में रख लेने मात्र से यह अभिकल्पना नहीं की जा सकती कि उसका आशय पर्स में रखी चीज को अपने उपयोग में लाना था ।

Question 8. ‘अ’ ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात्रि 10 बजे से 11 बजे के मध्य लूट कारित की। ‘अ’ को अधिकतम कितनी अवधि के लिये कारावास से दण्डित किया जायेगा ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 392 के अनुसार यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाए तो कारावास 14 वर्ष तक का हो सकेगा।


◼️◼️अध्याय 17 संपति के विरुद्ध अपराध

SEC 403 TO 414

Question 1. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा के अन्तर्गत सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग परिभाषित किया गया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 403 के अन्तर्गत सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग परिभाषित किया गया है।

◼️ धारा 403 के अनुसार जो कोई बेईमानी से किसी जंगम सम्पत्ति का दुर्विनियोग करेगा या उसको अपने उपयोग के लिए सम्परिवर्तित कर लेगा,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Question 2. मृत्यु कारित करने के उपरांत किसी के शरीर से आभूषण हटाना भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अंतर्गत अपराध है ?

◼️ किसी मृत व्यक्ति के शरीर से बेईमानी से गहने निकाल लेने का अपराध भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 404 अन्तर्गत अपराध है।

◼️ धारा 404 के अनुसार जो कोई किसी सम्पत्ति को, यह जानते हुए कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रहीं है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है,

👉 बेईमानी से दुर्विनियोजित करेगा या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा,

👉 और यदि वह अपराधी, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के समय लिपिक या सेवक के रूप में उसके द्वारा नियोजित था, तो कारावास सात वर्ष तक का हो सकेगा।

Question 3. एक बैंक का एक कैशियर , बैंक से 10,000 / – रु . इस नियत से ले गया कि एक माह के अन्दर रुपया वापस कर देगा । कैशियर ने कौन सा अपराध किया ?

◼️ आपराधिक न्यास भंग ।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 405 में आपराधिक न्यासभंग को परिभाषित किया गया है। धारा 405 के अनुसार जो –

◾”कोई सम्पत्ति या सम्पत्ति पर कोई भी अख्त्यार किसी प्रकार अपने को न्यस्त किये जाने पर उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है

◾या उसे अपने उपयोग में सम्परिवर्तित कर लेता है या जिस प्रकार ऐसा न्यास निर्वहन किया जाना है, उसको विहित करने वाली विधि के किसी निर्देश का

◾या ऐसे न्यास के निर्वहन के बारे में उसके द्वारा की गयी किसी अभिव्यक्त या विवक्षित वैध संविदा का अतिक्रमण करके बेईमानी से उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन करता है, या जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का ऐसा करना सहन करता है, वह “आपराधिक न्यासभंग” करता है।”

👉 आपराधिक न्यासभंग का अपराध चल एवं अचल दोनों प्रकार की सम्पत्ति का किया जाता है।

Question 4. एक पुलिस अधिकारी, यातायात उल्लंघनकर्ता से 5000/- रुपये की राशि जुर्माने के रूप में प्राप्त करता है। वह उक्त राशि नियत अवधि के तीन माह पश्चात राजकोष में जमा करवाता है। वह कौन सा अपराध करता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 409 के अनुसार, जो कोई लोक सेवक के नाते अथवा बँकर, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटार्नी या अभिकर्ता के रूप में अपने कारबार के अनुक्रम में किसी प्रकार की संपत्ति, संपत्ति पर कोई भी अख्त्यार अपने को न्यस्त होते हुए

👉 उस संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करेगा,

◼️ वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Question 5. कौन-सी वस्तु चोरी की संपत्ति नहीं कही जाएगीः

(a) जिसका कब्जा छल के द्वारा प्राप्त हुआ हो ☑️
(b) जिसका कब्जा लूट के द्वारा प्राप्त हुआ हो
(c) जिसका कब्जा डकैती के द्वारा प्राप्त हुआ हो
(d) जिसका कब्जा आपराधिक न्यासभंग के द्वारा प्राप्त हुआ हो

◼️ जिसका कब्जा छल के द्वारा प्राप्त किया गया हो, वह चोरी की सम्पत्ति नहीं कहीं जाएगी।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 410 के अनुसार, वह सम्पत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा अंतरित किया गया है, और वह सम्पत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग किया गया है “चुराई हुई सम्पत्ति” कहलाती है,

👉 चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग भारत के भीतर किया गया हो या बाहर।

👉 किन्तु यदि ऐसी सम्पत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुँच जाती है जो उसके कब्जे के लिये वैध रूप से हकदार है, तो वह चुराई हुई सम्पत्ति नहीं रह जाती।

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 410 एवं 412 का आपराधिक तत्व किस संबंध में है ?

(a) स्थान
(b) समय
(c) व्यक्ति
(d) चोरी की संपत्ति पर कब्जा ☑️

👉 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 410 के अंतर्गत, चुराई हुई सम्पत्ति पर कब्जा चोरी द्वारा या उद्यापन द्वारा या लूट द्वारा प्राप्त किया जाता है,

👉 जबकि धारा 412 के अंतर्गत चुराई गई सम्पत्ति पर कब्जा डकैती द्वारा प्राप्त किया जाता है। |

अतः धारा 410 एवं 412 का आपराधिक तत्व चोरी की सम्पत्ति पर कब्जा प्राप्त करना है।◼️◼️अध्याय 17 संपति के विरुद्ध अपराध

SEC 415 TO 424

Question 1. धारा 415 के अंतर्गत छल के आवश्यक तत्व क्या हैं ?

1. किसी व्यक्ति को प्रबंचित करना

2.
( a ) प्रवंचित व्यक्ति को कपटपूर्वक या बेईमानी से ,

◾किसी व्यक्ति को सम्पत्ति परिदत्त करने या
◾ किसी व्यक्ति को कोई सम्पत्ति रखने हेतु सम्मति देने के लिए उत्प्रेरित करना ।

( b )
◾साशय उस व्यक्ति को कोई कार्य करने या करने का लोप करने के लिए उत्प्रेरित करना जिसे यदि इस प्रकार प्रवचित न किया गया हो तो न करता

◾तथा जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक , मानसिक ख्याति सम्बन्धी या साम्पत्तिक नुकसान कारित होती है , या होनी संभाव्य है ।

[ Sec 415 ]

👉 भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 417 छल के लिए दण्ड का उपबंध करती है, जिसके अनुसार, जो कोई छल करेगा, दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 2. छल के अपराध के लिए छल करने का आशय विद्यमान होना चाहिए-

(a) in the end / अन्त में
(b) in the middle / मध्य में
(c) Both the above / उपर्युक्त दोनों
(d) from the very beginning/ प्रारम्भ से ही

◼️ सूर्यलक्ष्मी कॉटन मिल्स लि. बनाम राजवीर इण्डस्ट्रीज लि. (2008 SCC) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह धारित किया कि धारा 415 और धारा 420 के अंतर्गत छल के अपराध के गठन हेतु कपटपूर्ण अथवा बेईमानीपूर्ण उत्प्रेरण प्रारम्भ से ही होना चाहिए, न कि किसी बाद के प्रक्रम पर ।

Question 3. क’ कपटपूर्वक अपने को ‘ब’ बताता है जो मर चुका है। ‘क’ किस धारा के अन्तर्गत दोषी है ?

◼️ प्रस्तुत मामले में ‘क’ ने भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 416 में परिभाषित ‘प्रतिरूपण द्वारा छल’ किया है।

◼️ अतः वह संहिता की धारा 419 के अंतर्गत दोषी होगा।

👉 प्रतिरूपण के द्वारा छल के लिए धारा 419 के अन्तर्गत तीन वर्ष तक के किसी भाँति के कारावास या जुर्माने या दोनों के दण्ड का प्रावधान किया गया है।

Question 4. ‘ क ‘ , श्रीमती ‘ ख ‘ को विश्वास में लेता है कि वह ( क ) अपने जादू के बल पर करेन्सी नोट्स , हीरे – जवाहरात और सोने के आभूषणों को एक घंटे में दुगना कर सकता है । उसके विश्वास में आ कर श्रीमती ‘ ख ‘ 5,000 / – के करेन्सी नोट्स और एक तीन तोले सोने का नेकलेस ‘ क ‘ के निर्देशानुसार उसके सन्दूक में डाल देती है , जिसे ‘ क ‘ एक एक घंटे बाद खोलने का निर्देश दे देता है । तत्पश्चात , ‘ क ‘ वहां से यह कह कर चला जाता है कि उसे इसी शहर के किसी अन्य स्थान पर जादू का एक करिश्माई शो करना है । श्रीमती ‘ ख ‘ तद्नुसार जब उक्त सन्दूक को खोल कर देखती है तो उसमें रद्दी कागज के टुकड़े और कोयले मिलते हैं । ‘ क ‘ को ढूंढा जाता है , परन्तु वह उस शहर में कहीं पर नहीं मिलता है । ‘ क ‘ ने कौनसा अपराध किया ?

◾ सम्पत्ति परिदत्त करने के लिये बेईमानी से उत्प्रेरित करते हुए छल करना ।

धारा 420 ]

👉 जो कोई छल करेगा और तद्द्द्वारा उस व्यक्ति को जिसे प्रबंचित किया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करेगा कि वह कोई सम्पत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या किसी भी मूल्यवान प्रतिभूति को या किसी चीज को, जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित हो, और जो मूल्यवान प्रतिभूति में सम्परिवर्तित किये जाने योग्य हो, पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे या नष्ट कर दे,

👉 वह दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक हो सकेगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।◼️◼️अध्याय 17 संपति के विरुद्ध अपराध

SEC 425 TO 440

Question 1. ‘ रिष्ट ‘ का क्या अभिप्राय होता है ?

◾जो कोई साशय या सम्भाव्य जानते हुए कि वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे , किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है ,

◾जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है , या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है ,

👉 उसे ‘ रिष्टि ‘ कहते हैं ।

👉 उदाहरणार्थ : यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के खेत को पशुओं से चरा कर , झोंपड़ी में आग लगा कर नदी में अंगूठी फेंक कर अथवा बर्फ – घर में पानी छोड़ कर साशय सदोष हानि कारित करता है तो वह ‘ रिष्टि का अपराध कारित करता है ।

धारा 425 ]

Question 2. भारतीय दण्ड संहिता में रिष्टि के लिये अधिकतम कारावास है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 426 रिष्टि के अपराध के दण्ड से संबंधित है। जो कोई रिष्टि करेगा वह कारावास से जो तीन माह की या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा ।

Question 3. क्या कोई व्यक्ति अपनी ही सम्पत्ति नष्ट कर रिष्टि का अपराध कारित कर सकता है ?

◾ हाँ । [ धारा 425 ] स्पष्टीकरण -2

◾ उदाहरण – ‘ क ‘ और ‘ य ‘ एक घोड़े के संयुक्त स्वामी हैं । ‘ य ‘ को सदोष हानि कारित करने के आशय से ‘ क ‘ घोड़े को गोली मार देता है । ‘ क ‘ ने रिष्टि की है । हालांकि वह घोड़ा उसका अपना भी था ।

Question 4. रिष्टि के लिए संहिता की किस धारा में और क्या दण्ड प्रावधानित है ?

धारा 426 में जो तीन मास तक का किसी भी भांति का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकेगा ।

Question 5. ‘अ’ एक अश्वशाला का स्वामी है, जहाँ घोड़ों की पेयजल हेतु जलप्रदाय सेवा उपलब्ध है। ‘ब’ उक्त जलप्रदाय सेवा के प्रवाह को यह जानते हुए भी कि इससे घोड़ों के पेयजल में कमी कारित होगी, अपने कृषि भूमि की ओर मोड़ देता है। ‘ब’ एक अपराध कारित करता है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या में ‘ब’ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 430 के अन्तर्गत जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि का अपराध कारित करता है।

◼️ धारा 430 के अनुसार जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव-प्राणियों के या उन जीव-जन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो, या कमी कारित होना वह सम्भाव्य जानता हो,

👉 वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Question 6. संहिता की धारा 440 क्या उपबंधित करती है ?

◾ मृत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात की गयी रिष्टि को दण्डनीय बनाने से सम्बन्धित है ।

◾ इसमें 5 वर्ष तक की अवधि का किसी भी भांति का कारावास या जुर्माना या दोनों के दण्ड का प्रावधान है ।◼️◼️अध्याय 17 संपति के विरुद्ध अपराध

SEC 441 TO 462

Question 1. किन्नरों के एक समूह ने अ के घर में प्रवेश किया और रूपयों की मांग की जिसके लिए उसने मना कर दिया। व उन्हें बाहर निकलने को कहा, वे मकान से बाहर नहीं निकले। क्या उन्होंने कोई अपराध किया है ?

◼️ किन्नरों के द्वारा किया गया कार्य भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 441 में परिभाषित आपराधिक अतिचार का अपराध होगा,

👉 क्योंकि जैसे ही घर के स्वामी ने किन्नरों को घर से निकलने को कहा उसके बाद में उनका वहां से बाहर नही निकलना उनका विधिविरूद्ध माना जायेगा

👉 और ऐसा कार्य भवन स्वामी को अभित्रस्त, अपमानित या क्षुब्ध कारित करेगा।

Question 2. ‘आपराधिक अतिचार’ को परिभाषित कीजिये ।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा-441 के अनुसार-आपराधिक अतिचार (Criminal Trespass) के निम्नलिखित तत्व हैं-

(1) किसी दूसरे व्यक्ति के कब्जे में विद्यमान सम्पत्ति में या सम्पत्ति पर प्रवेश,

(2) यदि ऐसा प्रवेश विधि सम्मत है, तो विधि विरुद्ध रीति से ऐसी सम्पत्ति में………… पर बने रहना,

(3) ऐसी प्रविष्टि या अवैध रीति से बने रहना

(a) कोई अपराध कारित करने के आशय से, या
(b) किसी व्यक्ति को, जिसके अधिपत्य में ऐसी सम्पत्ति है, अभित्रस्त अपमानित या क्षुब्ध करने के आशय से, किय गया हो।

धारा 441 ]

Question 3. गृह अतिचार किसे कहते है ?

◾जो कोई किसी निर्माण , तम्बू या जलयान में जो मानव – निवास के रूप में उपयोग में आता है ,

◾या किसी निर्माण में , जो उपासना – स्थान के रूप में , या किसी सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता है ,

👉 प्रवेश करके या उसमें बना रह कर , आपराधिक अतिचार करता है , वह ‘ गृह अतिचार करता है ।

धारा 442 ]

Question 4. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा के अन्तर्गत प्रच्छन्न गृह अतिचार अपराध को परिभाषित किया गया है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 443 में प्रच्छन्न गृह अतिचार अपराध को परिभाषित किया गया है।

◼️ इसके अनुसार, जो कोई यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात गृह अतिचार करता है कि ऐसे गृह अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए

👉 जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह ‘प्रच्छन्न गृह- अतिचार’ करता है, यह कहा जाता है।

Question 5. रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार क्या है ?

धारा 444 के अनुसार – जो कोई सूर्यास्त के पश्चात और सूर्योदय से पूर्व प्रच्छन्न गृह – अतिचार करता है , वह रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार करता है , यहा कहा जाता है ।

Question 6. ‘अ’ को ‘य’ के घर के द्वार की चाबी मिल जाती है, जो ‘य’ से खो गई थी और वह उस चाबी से द्वार खोलकर ‘य’ के घर में प्रवेश करता है। ‘अ’ ने कौन-सा अपराध किया है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 445 के दृष्टांत (1) पर आधारित है। इस समस्या में ‘अ’ ने गृह- भेदन का अपराध कारित किया है।

◼️ धारा 445 के अनुसार– जो कोई व्यक्ति गृह अतिचार करता है गृह भेदन करता है यदि वह उस गृह में या उसके किसी भाग में निम्न छः तरीकों में से किसी तरीके से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है।

(1) यदि वह ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जो स्वयं उसने या उस गृह-अतिचार के किसी दुष्प्रेरक ने वह गृह- अतिचार के लिये बनाया है।

(2) यदि वह किसी ऐसे रास्ते से, जो उससे या उस अपराध के दुष्प्रेरक से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा मानव प्रवेश के लिए आशयित नहीं है या किसी ऐसे रास्ते से, जिस तक किसी दीवार या निर्माण पर सीढ़ी द्वारा अन्यथा चढ़कर पहुंचा है, प्रवेश करता या बाहर निकलता है।

(3) यदि वह किसी ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसको उसने या उस गृह अतिचार के किसी दुष्प्रेरक ने वह गृह-अतिचार करने के लिए किसी ऐसे साधन द्वारा खोला है, जिसके द्वारा उस रास्ते का खोला जाना उस गृह के अधिभोगी द्वारा आशयित नहीं था।

(4) यदि उस गृह अतिचार को करने के लिए, या गृह अतिचार के पश्चात् उस गृह से निकल जाने के लिए वह किसी ताले को खोलकर प्रवेश करता या बाहर निकलता है।

(5) यदि आपराधिक बल के प्रयोग या हमले या किसी व्यक्ति पर हमला करने की धमकी द्वारा अपना प्रवेश करता है या प्रस्थान करता है।

(6) यदि वह किसी ऐसे रास्ते से प्रवेश करता है या बाहर निकलता है जिसके बारे में वह जानता है कि वह ऐसे प्रवेश या प्रस्थान को रोकने के लिए बन्द किया हुआ है और अपने द्वारा या उस गृह अतिचार के दुष्प्रेरक द्वारा खोला गया है।

Question 7. राम तीर्थयात्रा पर जाते समय अपना संदूक जिसमें गहने हैं, अपने पड़ोसी श्याम को न्यस्त करके जाता है। श्याम उक्त संदूक को बिना किसी प्राधिकार के बेईमानीपूर्वक, रिष्टी करने के आशय से तोड़कर खोल लेता है। श्याम द्वारा अपराध किया गया है ?

◼️ प्रस्तुत समस्या में श्याम द्वारा भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 462 के अन्तर्गत अपराध किया गया है।

◼️ धारा 462 के अनुसार, जो कोई ऐसा बन्द पात्र, जिसमें सम्पत्ति हो, या होने का विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किये जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने, या दोनों से, दंडित किया जायेगा।

🔘 KEYS

धारा 449- मृत्यु से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गृह- अतिचार।

धारा 450- आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गृह अतिचार।

धारा 451- कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गृह-अतिचार।

धारा 454- कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह- अतिचार या गृह भेदन।

धारा 457- कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन।◼️◼️अध्याय 18 दस्तावेजों और संपत्ति चिन्हों संबंधी अपराधों के विषय में

SEC 463 TO 477

Question 1. कूट रचना की क्या परिभाषा है ?

◾ जो कोई मिथ्या दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की रचना करता है या मिथ्या दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के किसी भाग का निर्माण इस आशय से करता है

◾कि उससे कोई क्षति या नुकसान कारित हो या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाये , या यह कारित किया जाये कि

कोई व्यक्ति संपत्ति अलग करे ( part with ) या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा करे या इस आशय से रचता है कि कपट करे , या कपट किया जा सके , वह ‘ कूट रचना करता है

धारा 463 ]

Question 2. भारतीय दण्ड संहिता में जालसाजी से सम्बन्धित कुछ धाराओं में सन् 2000 के किस अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया ?

(a) The Information Technology Act / सूचना तकनीकी अधिनियम
(b) The Cr. P.C (Amendment) Act / दण्ड प्रक्रिया संहिता, (संशोधन) अधिनियम
(c) The Trade Mark Act / ट्रेडमार्क अधिनियम
(d) The Indian Evidence (Amendment) Act / भारतीय साक्ष्य (संशोधन) अधिनियम

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 का अध्याय 18 दस्तावेजों और सम्पत्ति चिन्हों सम्बन्धी अपराधों के सम्बन्ध में उपबंध करता है।

👉 इस अध्याय की धाराओं 463, 464, 466, 470,471, 474, 476, 477(A) में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 द्वारा संशोधन किया गया है। ये धारायें जालसाजी (कूटरचना) से सम्बन्धित है।

Question 3. कौन सी भारतीय दण्ड संहिता की धारा ‘मिथ्या दस्तावेज रचना’ को परिभाषित करती है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 464 के अनुसार– कोई व्यक्ति मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख रचता है जब वह बेइमानी से या कपटपूर्ण आशय से-

(1) किसी दस्तावेज को या दस्तावेज के भाग को रचित हस्ताक्षरित, मुद्रांकित या निष्पादित करता है।

(2) किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को या किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के भाग को रचित या पारेषित करता है।

(3) किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पर कोई चिह्न लगाता है।

(4) किसी दस्तावेज के निष्पादन का या ऐसे व्यक्ति या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की अधिप्रमाणिकता का द्योतक करेन वाला कोई चिह्न लगाता है।

Question 4. कूटरचना के लिए दण्ड संहिता की किस धारा में उपबन्धित है ?

◾ धारा 465 में कूट रचना के लिए दण्ड का प्रावधान किया गया है । जो किसी भांति का दो वर्ष का कारावास या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा ।

Question 5. ‘ य ‘ के बिल में ये शब्द लिखे गये हैं कि ‘ मैं निर्देश देता हूँ कि मेरी समस्त शेष सम्पत्ति ‘ क ‘ , ‘ ख ‘ और ‘ ग ‘ में बराबर – बराबर बाँट दी जाए । ‘ क ‘ बेइमानी से ‘ ख ‘ का नाम इस आशय से खुरच डालता है कि यह विश्वास कर लिया जाए कि समस्त सम्पत्ति ‘ क ‘ और ‘ ग ‘ के लिए ही छोड़ी गई थी । ‘ क ‘ ने कौन सा अपराध किया ?

धारा 463 एवं 464 के अर्थों में कूट रचना की है ।

Question 6. ‘ अ ‘ ने ब से ऋण लिया था जिसका भुगतान वह कर चुका था परन्तु उसकी रसीद उससे खो गयी थी । उस भुगतान की वह दूसरी रसीद बना लेता है , जब ‘ ब ‘ उस पर पुनः भुगतान का दावा करता है तो उस रसीद को ‘ अ ‘ साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करता है । अ ‘ किस अपराध का दोषी है ?

◾ किसी भी अपराध का नहीं ।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 471 के अनुसार, “A” किसी अपराध का दोषी नहीं है।

◼️ धारा 471 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को जिसके बारे में वह यह जानता हो कि वह कूटरचित है कपटपूर्वक या

👉 “बेइमानी से असली के रूप में उपयोग करता है” तो वह कूटरचना के लिए दण्डित किया जायेगा।

👉 प्रस्तुत समस्या में “A” कूटरचित रसीद का साक्ष्य के रूप में उपयोग करता है। अतः किसी अपराध का दोषी नहीं होगा।

◼️◼️अध्याय 18 दस्तावेजों और संपत्ति चिन्हों संबंधी अपराधों के विषय में
SEC 477A TO 489E

Question 1. लिपिक, अधिकारी या सेवक होते हुए अथवा उक्त नाते नियोजित होते हुए या कार्य करते हुए लेखा का मिथ्याकरण अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 477A के अनुसार, जो कोई लिपिक, आफिसर या सेवक होते हुए या नियोजित होते हुए या कार्य करते हुए किसी पुस्तक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यावान प्रतिभूति या लेखा को जो उसके नियोजक का हो या नियोजक के कब्जे में हो या जिसे उसने नियोजक के लिए या उसकी ओर से प्राप्त किया हो

◼️ जान-बूझकर और कपट करने के आशय से नष्ट, परिवर्तित विकृत, या मिथ्याकृत करेगा अथवा किसी ऐसी पुस्तक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख कागज लेख मूल्यावान प्रतिभूति या लेखा से जानबूझकर कपट करने के आशय से कोई मिथ्या प्रविष्टि करेगा या करने का दुष्प्रेरण करेगा या उसमें से या उसमें किसी तात्विक विशिष्ट का लोप या परिवर्तन करेगा या करने का दुष्प्रेरण करेगा

👉 वह दोनों में से किसी की भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 2. एक पटवारी राजस्व अभिलेख तैयार करते समय, आशय पूर्वक, दस्तावेजों में गलत तथ्यों को प्रविष्ठ करता है और उसे भूमि के वास्तविक स्वामी को हानि कारित करने के आशय से हस्ताक्षरित एवं सत्यापित करता है। पटवारी दोषी है-

(a) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 और 468 के अन्तर्गत दण्डनीय, मिथ्या / कूटरचित दस्तावेज बनाने के अपराध का।

(b) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 471 के अन्तर्गत दण्डनीय, कूटरचित दस्तावेज को प्रयुक्त करने के अपराध का ।

(c) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 406 के अन्तर्गत दण्डनीय, आपराधिक न्यासभंग के अपराध का।

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।

◼️ D ☑️ प्रस्तुत समस्या में पटवारी भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 477-A के अंतर्गत लेखा के मिथ्याकरण, का दोषी है।

Question 3. भारतीय दण्ड संहिता की कौन-सी धारा ‘सम्पत्ति चिन्ह’ से सम्बन्धित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 479 ‘सम्पत्ति चिन्ह’ से सम्बन्धित है।

👉 इस धारा के अनुसार, वह चिन्ह, जो यह द्योतन करने के लिए उपयोग में लाया जाता है कि जंगम सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति की है, सम्पत्ति चिह्न कहा जाता है।

Question 4. भारतीय दण्ड संहिता की कौन सी धारा करेन्सी नोटों अथवा बैंक नोटों के कूटकरण के अपराध से संबंधित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 489A करेंसी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण के अपराध से संबंधित है।

👉 धारा 489A के अनुसार, जो यह अपराध कारित करेगा वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

◼️◼️Chapter 19 + Chapter 20 + Chapter 21 सेवा संविदाओ के अपराधिक भंग के विषय में / विवाह सम्बन्धि अपराध / मानहानि

SEC 490 TO 502

Question 1. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा के अन्तर्गत ‘लोप’ न कि कोई कार्य, अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 491 के अन्तर्गत कोई लोप न कि कोई कार्य अपराध है।

◼️ धारा 491 में प्रावधान किया गया है कि जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति की, जो किशोरावस्था या चित्तविकृति या रोग या शारीरिक दुर्बलता के कारण असहाय है या अपनी निजी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए असमर्थ है, उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए विधिपूर्ण संविदा द्वारा आबद्ध होते हुए स्वेच्छया ऐसा करने में लोप करेगा,

👉 वह कारावास से जिसकी अवधि 3 मास तक की हो सकेगी या 200 रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 2. द्विविवाह- अपराध से संबंधित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 494 से कौन प्रभावित होते हैं ?

◼️भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 494 के अनुसार जो कोई पति या पत्नी के जीवित होते हुए उसके जीवन काल में विवाह करेगा

◼️ वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

◼️ धारा 494 से स्पष्ट है कि द्विविवाह से पुरुष एवं महिला समान रूप से प्रभावित होते हैं। द्विविवाह का प्रावधान सभी धर्म की महिलाओं पर तथा हिन्दू पुरुष पर लागू होगा।

👉 सरला मुद्गल, प्रेसीडेंट, कल्याणी बनाम भारत संघ, 1995 (S.C.) का वाद भारतीय दण्ड संहिता 1860 की | धारा 494 में प्रावधानित द्विविवाह से सम्बन्धित है।

Question 3. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में “विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्ण विवाहकर्म के पूरा कर लेना ” दण्डनीय है ?

◼️भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 496 ‘विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्ण विवाह कर्म को पूरा कर लेना’ को परिभाषित करती है।

◼️ जिसके अनुसार, जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्ण आशय से विवाहित होने का कर्म यह जानते हुए पूरा करेगा कि तद्द्द्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है,

👉 वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Question 4. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 497 में परिभाषित जारता, किसके विरुद्ध होने वाला एक अपराध है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 497 जारता के अपराध के लिए केवल पुरुष को दण्डित किया जाता है और यह अपराध महिला के पति के विरूद्ध किया जाता है,

👉 यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 (3) के सन्दर्भ में प्रावधानित है।

◼️ जारता के अपराध में महिला को दोषी नहीं माना जाता है।

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 497 में ‘जारता’ को परिभाषित किया गया है। इस धारा के अनुसार कोई व्यक्ति किसी अन्य पुरुष की पत्नी से उस पुरुष (महिला का पति ) की सहमति से मैथुन करता है, तो वह जारता के अपराध का दोषी नहीं है।

👉 जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ (2018) के वाद में भारतीय | दण्ड संहिता की धारा 497 को संवैधानिक घोषित किया गया।

👉  जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ, 2018 (SC) के वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि ‘पति अपनी पत्नी का स्वामी नहीं है।’ यह वाद धारा 497 जारकर्म से संबंधित है।

Question 5. भारतीय दण्ड संहिता की किस धारा में क्रूरता की परिभाषा दी गई है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 498A में क्रूरता की परिभाषा दी गई है। धारा 498A के स्पष्टीकरण के अनुसार क्रूरता से अभिप्रेत है-

() जानबूझकर किया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रकृति का है। जिससे उस स्त्री को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस स्त्री के जीवन, अंग या स्वास्थ्य को (जो मानसिक हो या शारीरिक) गम्भीर क्षति का खतरा कारित करने की सम्भावना है, या

() किसी स्त्री को तंग करना, जहाँ उसे या उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरूद्ध मांग को पूरी करने के लिए प्रपीड़ित करने की दृष्टि से या उसके अथवा उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति के ऐसे माँग पूरी करने में असफल रहने के कारण इस प्रकार तंग किया जा रहा है।

👉 धारा 498- A. 1983 के अधिनियम संख्या 46 द्वारा अन्तः स्थापित की गई जो कि 25 दिसम्बर 1983 से प्रवृत्त हुई है।

👉 इस धारा के अन्तर्गत किसी स्त्री के पति या उसके नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करने के लिए तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माना दण्ड का प्रावधान किया गया है।

👉 इन्दरराज मालिक बनाम सुनीता मलिक के वाद में “क्रूरता” का परिभाषित करते हुए न्यायालय ने कहा कि किसी सम्पत्ति या मूल्वान प्रतिभूति की अवैध माँग करना महिला का उत्पीड़न करना है।

Question 6. धारा 499 के आवश्यक तत्व क्या हैं ?

1 ) किसी व्यक्ति के बारे में किसी लांक्षन का लगाया जाना या लांक्षन का प्रकाशन

2 ) ऐसे लांक्षन

( a ) शब्दों द्वारा या तो बोलकर अथवा पढ़े जाने के लिए आशयित ।
( b ) संकेतों द्वारा ।
( c ) दृश्यरूपणों द्वारा लगाये जाने चाहिए ।
( d ) ऐसे लांक्षन अपहानि पहुँचाने के आशय से लगाये जाये या इस ज्ञान के विश्वास से लगाये जायें कि ये उस व्यक्ति की अपहानि कारित करेंगे जिनके विषय में ये लगाये गये हैं ।

Question 7. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 499 के कुल कितने अपवाद हैं ?

◾दस ।

Question 8. मानहानि के अपराध के लिये आरोपित व्यक्ति को कौनसे बचाव उपलब्ध है ?

मानहानि के आरोपी के लिये निम्नलिखित बचाव उपलब्ध है :

◾लोक कल्याण हेतु सत्य बात का लांछन
◾लोक सेवकों का लोकाचरण ,
◾किसी लोक प्रश्न के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति का आचरण ,
◾न्यायालयों की कार्यवाहियों की रिपोर्टों का प्रकाशन , 

◾न्यायालय के साक्षियों के आचरण बाबत कथन ,

◾लोक कृति के गुणागुण ,

◾विधिपूर्ण प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा सद्भावपूर्वक की गई परिनिन्दा के विषयों पर प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सदभावपूर्वक अभियोग लगाना और अपने हितों की संरक्षा के लिये लगाये गये सद्भावी लांछन

धारा 499 – अपवाद 1 से 9 ]

Question 9. ‘ क ‘ एक विधान – सभा का सदस्य है । वह विधानसभा में भाषण देते हुए एक मंत्री पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर उसे बदनाम करता है । ‘ क ‘ ने क्या अपराध किया ?

◾ चूंकि ‘ क ‘ का कृत्य विधानसभा का सदस्य होने के कारण विशेषाधिकार की श्रेणी में आता हैं , अतः उसने कोई अपराध कारित नहीं किया । |

धारा 499 व 500 तथा भारतीय संविधान का अनच्छेद 194 ]

सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ 2018 के वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह धारित किया कि भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 499 तथा 500 संवैधानिक है क्योंकि ख्याति का अधिकार अनुच्छेद 21 में प्रावधानित गरिमापूर्ण जीवन का एक अभिन्न अंग है।◼️◼️ Chapter 22 ( आपराधिक अभित्रास अपमान और क्षोभ ) / Chapter 23 ( अपराधों को करने के प्रयत्न )

SEC 503 TO 511

Question 1. ‘आपराधिक अभित्रास’ की परिभाषा दीजिये ।

◼️ जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति ( या किसी ऐसे व्यक्ति के जिसमें वह व्यक्ति हितबद्ध हो ) के शरीर ख्याति या सम्पत्ति को कोई क्षति करने की धमकी

◼️ इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाये या उससे ऐसा कार्य कराया जाये जिसे करने के लिये वह वैध रूप से आबद्ध न हो

◼️ या किसी ऐसे कार्य का लोप कराया जाये जिसे करने के लिये वह विधितः हकदार हो ,

तब वह आपराधिक अभित्रास करता है ।

धारा 503 ]

Question 2. लोक शान्ति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से साशय अपमान, किस धारा में दण्डनीय अपराध है ?

◼️ लोक शांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से साशय अपमान, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 504 के अधीन दण्डनीय है।

◼️ धारा 504 के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा और तद्द्द्वारा उस व्यक्ति को इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक-शांति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा,

👉 वह दो वर्ष तक की दोनों में से किसी भाँति के कारावास की जिसकी अवधि हो सकेगी से या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा ।

Question 3. आई.पी.सी. की कौन-सी धारा दैवीय नाराजगी (डिवाइन डिसप्लेजर) की अवधारणा से संबंधित है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 508 में दैवीय प्रकोपन का भागी होने (डिवाइन डिसप्लेजर) के अपराध की अवधारणा का उपबंध किया गया है।

👉 धारा 508 व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवीय अप्रसाद का भाजन होगा, कराये गये कार्य को दण्डनीय बनाती है।

Question 4. एक युवा व्यक्ति किसी महिला के सामने दो हजार रुपए का नोट इस तरह लहराता है मानो महिला से किसी अशिष्ट व्यवहार के बदले वह धन देना चाहता है। उसे भा.द.स. की किस धारा के अन्तर्गत अभियोजित किया जाएगा ?

◼️ प्रस्तुत समस्या भारतीय दण्ड संहिता की धारा 509 पर आधारित है। धारा 509 के अनुसार,

• जो कोई किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहेगा,

• कोई ध्वनि या अंग विक्षेप करेगा या कोई वस्तु प्रदर्शित करेगा,

• इस आशय से कि ऐसी स्त्री द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाय या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाय या ऐसी स्त्री के एकान्तता का अतिक्रमण करेगा,

👉 वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया। जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

Question 5. ‘आपराधिक अभित्रास’ एवं ‘उद्दापन’ में अन्तर स्पष्ट कीजिए

◼️ आपराधिक अभित्रास में अभित्रस्त व्यक्ति कोई सम्पत्ति परिदत्त नहीं करता , परन्तु सम्पत्ति का सौंपा जाना ( परिदान ) उद्दापन के लिए आवश्यक है ।

◼️ आपराधिक अभित्रास का उद्देश् किसी व्यक्ति को धमकी देकर कोई ऐसा कार्य करने के लिए उत्प्रेरित करना है जिसे करने के लिए वह विधि द्वारा आबद्ध नहीं है या ऐसा लोप कराने के लिए उत्प्रेरित करना है जिसे करने के लिए वह विधि द्वारा आबद्ध है । परन्तु उद्दापन में अभियुक्त का तत्काल उद्देश्य कोई मूल्यवान प्रतिभूति या धन प्राप्त करना होता है ।

◼️ आपराधिक अभित्रास में यह सदैव आवश्यक नहीं है कि धमकी उस व्यक्ति को दी जाए जिसे प्रभावित करने का अभियुक्त का उद्देश्य हो , वह परोक्षतः भी दी जा सकती है , परन्तु उद्दापन का अपराध सदैव अभियुक्त की उपस्थिति में ही होता है और इससे व्यथित व्यक्ति भयवश सम्पत्ति पने के लिए तैयार हो जाता है ।

◼️ आपराधिक अभित्रास के अन्तर्गत यह आवश्यक नहीं है कि धमकी से आशयित परिणाम हो ही , परन्तु उद्दापन का अपराध तभी पूर्ण होता है जब आशयित सम्पत्ति वास्तव में सौंप दी जाती है ।

Question 6. भारतीय दण्ड संहिता का कौन सा प्रावधान मत्त व्यक्ति द्वारा लोक-स्थान में अवचार को दण्डित करता है ?

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 510 में प्रावधान किया गया है जो कोई मत्तता की हालत में

◼️ किसी लोक स्थान में या किसी ऐसे स्थान में जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आएगा और वहा इस प्रकार का आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो,

👉 वह सदा कारावास से जिसकी अवधि 24 घण्टे तक की हो सकेगी या जुमनि से जो 10 रुपये तक हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

Question 7. अपराध का प्रयत्न उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास के………अवधि से दंडनीय होगा ?

(a) Half / आधे

(b) One fourth / एक चौथाई

(c) One third / एक तिहाई

(d) Full/पूरे

◼️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 511 के अंतर्गत आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दण्ड का प्रावधान किया गया है।

◼️ इस धारा के अनुसार जो कोई इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या कारावास से दण्डनीय अपराध करने का या ऐसा अपराध कारित किये जाने का प्रयत्न करता है और ऐसे प्रयत्न के दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता द्वारा नहीं किया गया है

👉 वहाँ वह उस अपराध के लिए उपबन्धित किसी भी भाँति के कारावास के लिए उस अवधि के लिए जो यथास्थिति आजीवन कारावास से आधे तक हो सकेगी या उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि से आधे तक हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो उस अपराध के लिए उपबन्धित हो या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Question 8. अपराध करने की तैयारी और इसके प्रयत्न में अन्तर स्पष्ट कीजिये ।

◼️ अपराध करने की तैयारी

( 1 ) किसी अपराध को करने से पूर्व इस पर विचार करना , उपायों व साधनों के बारे में विचार – विमर्श करना व एकत्रित करना अपराध करने की तैयारी की श्रेणी में आते हैं ।

( 2 ) कुछ अपवादों को छोड़कर सामान्यतः तैयारी करना दण्डनीय अपराध की परिधि में नहीं आता है ।

( 3 ) तैयारी का परिणाम सदैव व अनिवार्यतः अपराध में परिणित नहीं होता है ।

◼️ अपराध करने का प्रयत्न

( 1 ) अपराध करने की दिशा में तैयारी के आगे का प्रत्यक्ष व सक्रिय कदम उठाना ‘ अपराध करने का प्रयत्न कहलाता है ।

( 2 ) अपराध का प्रयत्न भी दण्डनीय अपराध है ।

( 3 ) प्रयत्न अपराध की दिशा में एक निश्चित कदम होता है ।

धारा 511 ]


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