10 Aug
2019

जुडिशरी एग्जाम स्कोर बूस्टर 40 CPC 1908 अभिवचन (आदेश 6) Pleading Order 6 Short Notes

अभिवचन (आदेश 6)

अभिवचन से तात्पर्य

नियम 1 के अनुसार ‘ अभिवचन ‘ से वादपत्र या लिखित कथन अभिप्रेत होगा |

अभिवचन का उद्देश्य

अभिवचन का सम्पूर्ण उद्देश्य पक्षकारो के बीच वास्तविक विवाद का निर्धारण , विवाद के विस्तार – क्षेत्र को सीमित करना , और यह देखना कि दोनों पक्ष को किस बिंदु पर परस्पर विरोध है । एक पक्षकार द्वारा दुसरे को आश्चर्यचकित करने से रोकना और न्याय की हत्या को रोकना है ।

नियम 2 के अनुसार अभिवचन में तात्विक तथ्यों का , न कि साक्ष्य का कथन होगा

इस नियम की व्याख्या करने से अभिवचन के जो सामान्य नियम उभर के आते है वो निम्न है –

1 . तथ्यों का अभिवचन करें विधि का नहीं – अभिवचन का सबसे महत्वूर्ण नियम यह है कि उसमे तथ्यों एवं घटनाओं का वर्णन किया किया जाना चाहिए न कि विधि का क्योंकि किन तथ्यों और घटनाओं पर कौन सी विधि लागू होगी यह निश्चित करना न्यायालय का काम है ।

2 . केवल सारभूत तथ्यों का अभिवचन करें
– अभिवचन में केवल सारवान तथ्यों का कथन होना चाहिए ।
सारवान तथ्यों से तात्पर्य उन तथ्यों से है जिस पर वादी का वाद हेतुक और प्रतिवादी का बचाव निर्भर करता है । दूसरे शब्दों में वे सारे तथ्य जिन्हें न्यायालय में साबित किया जाना चाहिए ताकि वाद हेतुक या बचाव का विद्यमान होना स्थापित किया जा सके , सारवान तथ्य कहलाते हैं ।

3 . तथ्यों का अभिवचन करे साक्ष्य का नहीं
अभिवचन में केवल उन्ही तथ्यों का कथन रहेगा जिस पर अभिवचन करने वाला पक्षकार अपने दावे या बचाव के लिए निर्भर करता है ।
किसी भी मामले में दो प्रकार के तथ्य होते है
a . वे तथ्य जिनको साबित किया जाना है , और
b . साक्ष्य सम्बन्धी तथ्य जिनके द्वारा उपरोक्त को साबित किया जाता है ।

-जिन सारभूत तथ्यों पर पक्षकार अपने बचाव या दावे के लिए निर्भर करता है उन्हें साबित किए जाने वाले तथ्य कहा जाता है ।
और ऐसे तथ्यों का कथन अभिवचन में अवश्य ही किया जाना चाहिए

-वही दूसरी तरफ उन तथ्यों को जिनके माध्यम से साबित किये जाने वाले तथ्यों को साबित किया जाता है , उन्हें साक्ष्य सम्बन्धी तथ्य कहा जाता है ।
अभिवचन में ऐसे तथ्यों का कथन नहीं किया जाना चाहिए ।

उदाहरण के लिए जहां ‘ A ‘ के जीवन पर एक बीमा पालिसी से सम्बंधित वाद बीमा कंपनी के विरुद्ध संस्थित किया गया है । बीमा पालिसी की एक शर्त यह है कि यदि बीमादार आत्महत्या कर लेता है तो बीमा पालिसी शून्य हो जायेगी ।
अगर बीमा कंपनी यह बचाव लेती है कि ‘ A ‘ ने आत्महत्या की थी तो बीमा कंपनी को यह अभिवचन करना चाहिए कि ‘ A ‘ की मृत्यु स्वयं अपने हाथ से हुयी है । वहां बीमा कंपनी यह अभिवचन नहीं कर सकती कि ‘ A ‘ कई दिनों से उदास था तथा यह कि उसने पिस्टल खरीदा और उसी से अपने को दाग लिया | यह सब साक्ष्य है , वे तथ्य जिनके माध्यम से साबित किया जाने वाला तथ्य अर्थात ‘ आत्महत्या ‘ साबित की जायेगी ।

4 . संक्षिप्त कथन 
अभिवचन संक्षेप में और शुद्धता के साथ तैयार किया जाना चाहिए । हर अभिकथन आवश्यकता अनुसार पैराग्राफ में विभक्त किया जाएगा और यथा क्रम संख्यांकित किया जाएगा ।

नियम 4 के अनुसार उन सभी मामलों में जहां अभिवचन करने वाला पक्षकार किसी दुर्व्यपदेशन , कपट , न्यासभंग , जानबूझकर किये गये व्यतिक्रम या असम्यक असर के अभिवाक पर निर्भर करता है , वहां इन सभी के बारे में विशेष विवरण दिया जाना चाहिए |      जहां आवश्यक हो वहां तारीख और विषय के साथ आवश्यक विवरण दिए जाने चाहिए ।

नियम 14 अभिवचन का हस्ताक्षरित किया जाना 

हर अभिवचन पक्षकार द्वारा और यदि उसका कोई प्लीडर हो तो उसके द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा ।
परन्तु जहां अभिवचन करने वाला पक्षकार अनुपस्थिति के कारण या किसी अन्य अच्छे हेतुक से अभिवचन पर हस्ताक्षर करने में असमर्थ है वहां वह ऐसे व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जा सकेगा जो उसकी ओर से उसे हस्ताक्षरित करने के लिए या वाद लाने की प्रतिरक्षा करने के लिए उसके द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत है ।

नियम 15 अभिवचनों का सत्यापन 

प्रत्येक अभिवचन का चाहे वह वादपत्र हो या लिखित कथन उसका सत्यापन पक्षकार द्वारा या पक्षकार में से किसी एक के द्वारा या किसी अन्य के द्वारा जिसके बारे में न्यायालय को समाधान हो जाये कि वह मामले के तथ्यों से परिचित है , सत्यापित किया जाएगा ।

अभिवचन का सत्यापन आवश्यक है परन्तु यदि सत्यापन समुचित नहीं है और वादी वादपत्र में अपना पक्ष स्पष्ट कर देता है , तो वादपत्र का समुचित न होना या सत्यापन का न होना , वादपत्र के ख़ारिज करने का कारण नहीं बनेगा ।

नियम 15 ( 2 ) के अनुसार सत्यापन करने वाला व्यक्ति संख्यांकित पैराओं के बारे में यह बतायेगा कि कौन सा पैरा वह – अपने निजी ज्ञान के आधार पर सत्यापित करता है और कौन सा पैरा वह ऐसी जानकारी के आधार पर सत्यापित करता है जो उसे मिली है और जिसके बारे में उसका यह विश्वास है कि वह सत्य है ।

नियम 15 ( 3 ) के अनुसार सत्यापन करने वाले व्यक्ति द्वारा वह सत्यापन हस्ताक्षरित किया जाएगा और उसमे उस तारीख का जिसको और उस स्थान का जहां यह हस्ताक्षरित किया गया था कथन किया जाएगा ।

नियम 15 ( 4 ) के अनुसार अभिवचन का सत्यापन करने वाला व्यक्ति भी अपने अभिवचन के समर्थन में शपथपत्र उपलब्ध कराएगा

यह एक अनिवार्य शर्त हो सकता है परन्तु जैसा कि जी . एम . सिद्देश्वर बनाम प्रसन्ना कुमार , 2013 के वाद में कहा गया कि चुनाव याचिका के अभिवचन के समर्थन में शपथपत्र जरुरी नहीं है ।

नियम 17 अभिवचन का संशोधन 

न्यायालय दोनों में से किसी पक्षकार को कार्यवाहियों के किसी भी प्रक्रम में अनुज्ञा दे सकेगा कि वह अपने अभिवचनो को ऐसी रीति से और ऐसे निर्बधनों पर जो न्याय संगत हो परिवर्तित करे या संशोधित करे और सभी ऐसे संशोधन किये जायेंगे जो पक्षकारो के बीच में विवादाग्रस्त वास्तविक प्रश्न के अवधारण के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो ।

परन्तु यह कि संशोधन के लिए कोई आवेदन विचारण प्रारम्भ होने के पश्चात् अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जब तक कि न्यायालय इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता है कि सम्यक तत्परता के पश्चात् भी पक्षकार मामले को विचारण प्रारम्भ होने से पूर्व नहीं उठा सकता था ।

न्यायालय का संशोधन मंजूर करने का विवेकाधीन अधिकार है ।
किसी भी संशोधन से पूर्व न्यायालय को निम्न बातो पर विचार करना चाहिए कि क्या ऐसा संशोधन –
1 . न्याय के हित में है , या
2 . पक्षकारों के बीच विवादग्रस्त वास्तविक प्रश्नों के अवधारण के लिए आवश्यक है , या ।
3 . वाद की बहुलता को रोकने के लिए क्या ऐसा किया जाना आवश्यक है ?
4 . दूसरे पक्षकार के लिए अन्यायपूर्ण नहीं है ।

संशोधन की अनुमति – सामान्यतया अभिवचन में संशोधन की अनुमति निम्न अवस्था में दी जायेगी 
1 . जहां ऐसा करना पक्षकारों के बीच विवादग्रस्त वास्तविक प्रश्नो के अवधारण के लिए आवश्यक है , और
2 . ऐसे संशोधन से विरोधी पक्षकार को कोई क्षति नहीं पहुंचती |

संशोधन की अनुमति कब अस्वीकार कर दी जायेगी 
1 . जहां ऐसा संशोधन पक्षकारो के बीच विवादग्रस्त वास्तविक प्रश्नों के अवधारण के लिए आवश्यक नहीं है ।
2 . जहां प्रस्तावित संशोधन से वादी का वाद पूर्णरूप से विस्थापित हो जाएगा |
3 . जहां ऐसे संशोधन का परिणाम दुसरे पक्षकार से उसके विधिक अधिकार को छीन लेना , जो उसमें समय के बीत जाने के कारण प्रोद्भूत हो गया है , अस्वीकार कर दिया गया है ।
4 . जहां संशोधन का आवेदन सद्भावपूर्वक नहीं दिया गया है ।
5 . जहां संशोधन पर्याप्त विलम्ब से चाहा गया हो और विलम्ब का संतोषजनक कारण न बताया गया हो ।
6 . जहां संशोधन से लिखित कथन में की गयी स्वीकृति वापस मान ली जायेगी वहां संशोधन की अनुमति नहीं दी जायेगी ।                  7 . जहां संशोधन विलम्ब से चाहा गया और वह बचाव की प्रकृति को बदल देता है ।

नियम 18 आदेश के पश्चात संशोधन करने में असफल रहना
जहां किसी पक्षकार ने अपने अभिवचन में संशोधन का आदेश प्राप्त कर लिया है , वहां उसे न्यायालय द्वारा निश्चित समय के भीतर या ऐसा समय निश्चित नहीं किया गया है , वहां आदेश की तिथि से 14 दिन के भीतर संशोधन कर देना चाहिए ।

यदि न्यायालय ने संशोधन की अवधि अपने आदेश द्वारा बढ़ा न दिया हो और सम्बंधित पक्षकार अपने अभिवचन में संशोधन करने में असफल रहता है और न्यायालय द्वारा निश्चित समय या 14 दिन , जैसा भी मामला हो , समाप्त हो जाता है , तो उस पक्षकार को संशोधन करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा |

परन्तु जहां ऐसा संशोधन निश्चित अवधि के अंतर्गत नहीं किया गया है , वहां कुछ विशेष परिस्थितियों में ऐसी अवधि संहिता की धारा 151 के अंतर्गत बढाई जा सकती है ।

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💡 TOI Vocab Of The Day

1. AGITATE (VERB): (उत्तेजित करना): upset

Synonyms: perturb, fluster

Antonyms: calm

Example Sentence:

The thought of questioning Tony agitated him extremely.

2. CAPRICIOUS (ADJECTIVE): (मनमौजी): fickle

Synonyms: inconstant, changeable

Antonyms: stable

Example Sentence:

It’s terrible to feel our livelihood hinges on a capricious boss.

3. IMPART (VERB): (प्रदान करना): communicate

Synonyms: pass on, convey

Antonyms: keep to oneself

Example Sentence:

The teachers imparted a great deal of knowledge to their pupils.

4. ABSURDITY (NOUN): (अर्थहीनता): idiocy

Synonyms: ridiculousness, stupidity

Antonyms: reasonableness

Example Sentence:

I laughed at the absurdity of the situation.

5. IMPERIL (VERB): (संकट में डालना): endanger

Synonyms: jeopardize, risk

Antonyms: safeguard

Example Sentence:

They advised against tax increases for fear of imperiling the recovery.

6. PERTURB (VERB): (घबड़ा देना): worry

Synonyms: upset, unsettle

Antonyms: reassure

Example Sentence:

They were perturbed by her rude behavior.

7. RESILIENT (ADJECTIVE): (प्रबल): strong

Synonyms: tough, hardy

Antonyms: vulnerable

Example Sentence:

Babies are generally far more resilient than new parents realize.

8. MODERATION (NOUN): (आत्मसंयम): self-restraint

Synonyms: restraint, self-control

Antonyms: extremism

Example Sentence:

He urged them to show moderation.

9. PREFATORY (ADJECTIVE): (प्रारंभिक): introductory

Synonyms: preliminary, opening

Antonyms: final

Example Sentence:

His prefatory remarks the author claims that

10. AFFRONT (VERB): (अपमान करना): insult

Synonyms: offend, outrage

Antonyms: compliment

Example Sentence:

She was affronted by his familiarity.

🎰 DAILY POLL

Why is that man looking around like that ? He.....................be lost.

निम्न में से किस राज्य के राज्यपाल ने स्थानीय लोगों के लिए निजी सेक्टर में 75 % सीटें आरक्षित करने वाले विधेयक को मंजूरी प्रदान की है ?

CRPC 1973 Sec 227 उन्मोचन ( डिस्चार्ज ) - पढ़िए महत्वपूर्ण लेख

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