LAW MOCK TEST KA ADDA

Online Law Questions Mock Test Platform पर आपका स्वागत हैं India's first Judiciary Exam Preparation & Law Job Alerts को समर्पित वेबसाइट RJS.MPCJ.UPPCSJ.UKPSC.JPSC CGPSC.Judicial Services इत्यादि प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए बहुपयोगी KICK START YOUR PREPARATION WITH LEGALBUZZNOW

16 Jul
2019

 CPC 1908 शपथपत्र (Affidavit) [आदेश 19 (नियम 1-3 )] धाराएं 30 एवं 139 जुडिशरी एग्जाम स्कोर बूस्टर 36 (हिन्दी में)

शपथपत्र (Affidavit)    [आदेश 19 (नियम 1-3 )]  धाराएं  30 एवं 139 👉 शपथपत्र के सम्बन्ध में धारा 30 में यह उपबंध है कि न्यायालय किसी भी समय या तो स्वप्रेरणा से या किसी भी पक्षकार के आवेदन पर यह आदेश दे सकता है कि कोई तथ्य शपथ-पत्र द्वारा साबित किया जाये। 👉 जबकि धारा […]

Read More
14 Jul
2019

जुडिशरी एग्जाम स्कोर बूस्टर लीगल बज्ज मॉक टेस्ट 35 (हिन्दी में)

LEGALBUZZ QUIZ 1 📋 IPC 1860 ‘ मेंस रिया ‘ से तात्पर्य है ( अ ) आशय ( ब ) ज्ञान ( स ) हेतु ( द ) दुराशय ☑️ 👉 वयाख्या – मेंसरिया से तात्पर्य अपराध भावना या दुराशय या आपराधिक मनःस्थिति है । यदि आपके पास कोई प्रश्न या सुझाव है, तो कृपया […]

Read More
8 Jul
2019

जुडिशरी एग्जाम स्कोर बूस्टर लीगल बज्ज मॉक टेस्ट 34 (हिन्दी में)

यदि आपके पास कोई प्रश्न या सुझाव है, तो कृपया हमें -piyushv05@gmail.com पर मेल करके बताएं ! LEGALBUZZNOW ONLINE MOCK TEST FEATURED- सभी मॉक टेस्ट न्यायिक सेंवाओ में चयनित वि धार्थियो द्वारा तैयार किये गए हैं । legalbuzznow.com के नियमित मॉक टेस्ट से स्वयं का आकलन करें जानिए हर मॉक टेस्ट के बाद अपनी आॅल […]

Read More
1 Jul
2019

FIRST INFORMATION REPORT लीगल बज्ज आर्टिकल जुडिशरी एग्जाम स्कोर बूस्टर 33 (हिन्दी में)

प्रथम सूचना रिपोर्ट आपराधिक न्याय प्रशासन को प्रभावी करने का प्रथम चरण प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराना है। 👉 प्रथम सूचना रिपोर्ट धारा 154 (1), 154(3) व धारा 156(3) द.प्र.सं. के माध्यम से दर्ज करायी जाती है। 👉 प्रथम सूचना रिपोर्ट किसी अपराध की सीमित सूचना होती है, वो वादी द्वारा थाना प्रभारी को दी […]

Read More

TP 1882 ‘वि​क्रय’ (बिक्री) पद संपति अंतरण अधिनियम,1882 की धारा 54 में परिभाषित किया गया हैं ।

CRPC 1973 दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 61 के अनुसार समन लिखित में होना चाहिए और इसके अतिरिक्त यह दो प्रतियों में आना चाहिए, हस्ताक्षरित होना चाहिए, उस पर न्यायालय की मुद्रा लगी होना चाहिए |

CPC 1908 आदेश से अभिप्राय सिविल न्यायालय के निर्णय की ऐसी औपचारिक अभिव्यक्ति से हैं,जो आज्ञप्ति नहीं हैंं ।

EVIDENCE ACT 1872 न्यायालय को दिया गया शपथ पत्र साक्ष्य नहीं होता हैं—धारा 3 पैरा 6

CPC 1908 आदेश 8 नियम 1 के अनुसार प्रतिवादी अपने परिवाद का लिखित कथन 30 दिन की अवधि में दाखिल करेगा ।

CRPC 1973 विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति के लिए 10 वर्षो का विधि व्यवसाय आवश्यक होता हैं—धारा 24(8)

CPC 1908 धारा 119 के अनुसार अप्राधिकृत व्यक्ति न्यायालय को संबोधित न कर सकेंगे—इस संहिता के प्रावधानों के अलावा अप्राधिकृत व्यक्ति जो प्लीडर,अटार्नी,अधिवक्ता नही हैं न्यायालय को संबोधित न कर सकेंगे।

CPC 1908 न्यायालय द्वारा पक्षकारों की परीक्षा आदेश 10

CONSTITUTION भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक कि नियुक्ति अनुच्छेद 148 के प्रावधान के अन्र्तगत होती हैं ।

TP 1882 धारा 5 के अनुसार जीवित व्यक्ति में कम्पनी अथवा निगम अथवा व्यक्तियों का समुह सम्मिलित हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 पक्षद्रोही साक्षी—जब गवाह बुलाने पक्ष के खिलाफ गवाही देता हैं तो वह पक्षद्रोही साक्षी कहलाता हैं ।-धारा 154

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता में लुट धारा 390 में परिभाषित हैं

CPC 1908 धारा 74 के अनुसार न्यायालय सथावर संपति के कब्जे के लिए 30 दिन की अवधि के लिए सिविल कारागार में निरुद्ध करने का आदेश दे सकता हैं और संपति का कब्जा दिला सकता हैं ।

IPC 1860 पूर्व दोषसिद्धि के लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा . . . के अधीन वर्धित दण्ड है -धारा 75

CRPC 1973 41 पुलिस वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकेगी ।

TP 1882 संपति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 58 में बंधक,बंधककर्ता,बंधकदार,बंधक धन और बंधक विलेख की परिभाषाए उपबंधित की गई हैं ।

CPC 1908 अपील क्या हैं—अपील वह परिवाद हैं जिसे किसी अधीनस्थ न्यायालय द्वारा किए गए अन्याय या गलती के लिए किसी उच्चतर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता हैं । जिसमें यह निवेदन होता हैं कि वह न्यायालय ऐसे अधिनस्थ न्यायालय के निर्णय या विनिश्चय को ठीक करे या उलट दे ।

CPC 1908 वाद पत्र का नामंजुर किया जाना आदेश 7 नियम 11

CONSTITUTION धन विधेयक केवल लोकसभा सदन में प्रस्तुत किया जाता हैं

CPC 1908 डि​क्री न्याय निर्णयन की ऐसी औपचारिक अभिव्यक्ति हैं जो वाद में सब या किन्ही विवाद ग्रस्त विषयों के सबंध में पक्षकारों के अधिकारो का निश्चायक रुप से अवधारण करती हैं ।

IPC 1860 धारा 77 के अनुसार कोई बात अपराध नही हैं जो न्यायिक कार्य करते हुए न्यायाधिस द्वारा ऐसी किसी शक्ति के प्रयोग में की जाती हैं जो या जिसके बारे में उसे सदभावपुर्वक विश्वास हैं कि वह उसे विधि द्वारा दी गई हैं ।

CONSTITUTION 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में आरम्भ में प्रदत्त सात मूल स्वतन्त्रताओं में से एक को घटा कर छः कर दिया गया ।

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता में पॉंच प्रकार के दण्डो का प्रावधान किया गया हैं—धारा 53

IPC 1860 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधो के संबध में भारतीय दण्ड संहिता के चैप्टर 16 में बताया गया हैं ।

CRPC 1973 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अन्र्तगत बलात्कार की पीडिता द्वारा बलात्कार सूचना देने पर महिला पुलिस अधिकारी या कोई महिला अधिकारी लेखबद्ध करेगा । — धारा 154(1)

EVIDNCE ACT 1872 रेस जेस्टा का सिद्धान्त या एक ही संव्यवहार के भाग या संबधित तथ्य और कार्य का सिद्धान्त धारा 6 में हैं ।

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता का प्रारुप मैकाले ने तैयार किया था ।

IPC 1860 धारा 78—जल्लाद जो मृत्यु दण्ड का निष्पादन करता हैं अपराध नही हैं ।

CONSTITUTION जीविकापार्जन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंर्तगत एक मुल अधिकार हैं ।

IPC 1860 आपराधिक दायित्व से उन्मुक्ति के लिए बच्चे की आयु 7 वर्ष से कम होनी चाहिए—धारा 82

CONSTITUTION 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1976 ई द्वारा उददेशिका में ‘समाजवादी’ ‘पंथ निरपेक्ष’ तथा ‘राष्ट्र की अंखण्डता’ शब्द जोडे गए ।

CONTRACT ACT 1872 भारतीय संविदा अधिनियम में प्रतिफल की व्याख्या धारा 2(घ) में दी की गई हैं ।

CPC 1908 सिविल प्रकिया संहिता 1908 1 जनवरी 1908 को लागु हुई

EVIDENCE ACT 1872 किसी व्यक्ति की ‘सिविल डेथ’मान ली जाती हैं जब वह 7 वर्ष तक की अवधि तक गायब रहे अथवा उसके बारे में उक्त अवधि में यह नहीं सुना गया की वह जीवित हैं ।—धारा 108

IPC 1860 स्वैच्छया से उपहति कारित करने के लिए दण्ड का प्रावधान भारतीय दण्ड संहिता की धारा 323 में हैं ।

CONTRACT ACT 1872 ‘एड आइडेम’ से तात्पर्य है समान भाव से सहमति ।

TP 1882 किसी भी लिखत का निष्पादन पहले होता हैं और अनुप्रमाणन बाद में होता हैं ।

IPC 1860 विधि विरुद्ध जमाव को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 141 में परिभाषित किया गया हैं ।

CRPC 1973 धारा 57 — बिना वारण्ट के गिरफ्तार करने के बाद मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अभिरक्षा में रखने की अवधि 24 घण्टे हो सकती हैं ।

CRPC 1973 ‘ स्थान ‘ के अन्तर्गत गृह एवं भवन यान एवं जलयान तम्बू आते हैं—धारा 2(p)

CONSTITUTION नागरिकता संबधी उपबंधो की विवेचना अनुच्छेद 5 से 11 में हैं ।

CPC 1908 दीवानी प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दायर कैवियट 90 दिनों तक प्रभावी रहता हैं ।

IPC 1860 भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना भारतीय दण्ड संहिता कि धारा 121 में दण्डनीय अपराध हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 जिस तथ्य की न्यायालय न्यायिक अवेक्षा करेगा उसे साबित करना आवश्यक नहीं है ।—धारा 56

CPC 1908 व्यवहार प्रक्रिया संहिता,1908 के अंतर्गत डिक्री को धारा 2(2) में परिभाषित किया गया है

EVIDENCE ACT 1872 न्यायालय के निरक्षण के लिए पेश की गई दस्तावेज—धारा 62

CRPC 1973 समन की तामील पुलिस अधिकारी द्वारा,न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा,किसी अन्य प्राधिकृत लोक सेवक द्वारा की जा सकती हैं ।—धारा 62

CRPC 1973 दण्ड प्रकिया संहिता 1973 की धारा 125 में एक पत्नि भरण पोषण का अधिकार नहीं रखती हैं,यदि वह जारता में रह रही हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 वचनात्मक विबंध के सिद्धान्त का मुल संविदा विधि में प्रतिफल के नियम के अपवाद के रुप में पाया जाता हैं ।

CONTRACT ACT 1872 दो या अधिक व्यक्ति सम्मत हुए तब कहे जाते है जब वे किसी एक बात पर एक ही भाव में सहमत होते है ( इसका लेटिन अर्थ ad idem है ) —धारा 53

EVIDENCE ACT 1872 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 11 में प्ली आॅफ एलीबादई (Alibi) का प्रावधान किया गया हैं ।

CRPC 1973 बसन्त कुमारी बनाम शरत कुमार 1982 के प्रकरण में निर्धारित किया गया कि भरण पोषण के दायित्व से भिखारी,साधु,दीवालिया या कर्जदार होने से वह व्यक्ति मुक्त नही होगा ।

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 354 D पीछा करने के अपराध के लिए उपबंधित हैं ।

CPC 1908 सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 3 के अनुसार जिला न्यायालय उच्च न्यायालय के अधीनस्थ हैं और जिला न्यायालय से अवर श्रेणी का हर सिविल न्यायालय और लघुवाद न्यायालय उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालय के अधिनस्थ हैं ।

IPC 1860 कुटरचित या कूटकृत करेंसी नोट या बैंक नोटों को कब्जे में रखना 498 ग में दण्डनीय हैं ।

IPC 1860 पुर्व दोषसिद्धि के लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 75 में वर्धित दण्ड का प्रावधान हैं ।

TP 1882 संपति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 127 दुर्भर दान से संबधित है।

CRPC 1973 सहायक सेशन न्यायाधिस मृत्युदण्ड,आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की सजा को छोडकर विधि द्वारा अधिकृत कोई भी दण्ड दे सकता हैं ।

IPC 1860 एकांत परिरोध की अधिकतम सीमा 3 माह होती हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 शिनाख्त (पहचान) परेड धारा 9 हैं ।

CPC 1908 अनुपूरक कार्यवाहियों को सिविल प्रक्रिया संहिता कि धारा 94 में उपबंधित किया गया हैं

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता की धारा 340 के अन्तर्गत दोषपूर्ण पाबंदी परिभाषित किया गया है |

CONTRACT ACT 1872 कोई भी करार विधि द्वारा प्रर्वतनीय हो सकता हैं यदि वह धारा 10 में वर्णित शर्तो का पालन करे ।

CONSTITUTION राष्टपति की मृत्यु,त्याग पत्र या पदच्युत से रिक्त स्थानों को अधिकतम 60 दिन के भीतर भरा जाना चाहिए ।

TP 1882 विनिमय की परिभाषा संपति अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 118 में दी गई हैं ।

CRPC 1973 दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 अजमानतीय अपराध से संबंधित है ।

CRPC 1973 सत्र न्यायालय के न्यायाधीश का स्थान्तरण उच्च न्यायालय द्वारा किया जाता हैं—धारा 9

CRPC 1973 अग्रिम जमानत के बारे में प्रावधान धारा 438 में हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 सह अपराधी का साक्ष्य के बारे मे प्रावधान करती हैं ।

CONTRACT ACT 1872 शुन्य संविदा का अर्थ है संविदा जो विधि द्वारा प्रर्वतनीय नहीं हैं—धारा 2(छ)…CONSTITUTION ‘विधि का शासन’ या ‘कोई भी व्यक्ति विधि से ऊपर नही हैं’ निहित हैं ।-अनुच्छेद 14

CRPC 1973 दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 95 के अधीन समपहरण की घोषणा उच्च न्यायालय द्वारा अपास्त की जा सकती हैं—धारा 96

IPC 1860 भारतीय दण्ड संहिता 1 जनवरी 1862 से लागु हुई ।

संपत्ति अंतरण अधिनियम 1 सितम्बर 1872 से प्रभावशील हुआ ।

CONSTITUTION धन विधेयक की परिभाषा अनुच्छेद 110 में हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1 सितम्बर 1872 के दिन प्रर्वत हुआ था ।

EVIDENCE ACT 1872 विबंध का सिद्धान्त साक्ष्य अधिनियम कि धारा 115 में है ।

CPC 1908 सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 30 एवं 139 तथा आदेश 19 शपथ पत्र से सं​बधित हैं ।

EVIDENCE ACT 1872 साक्ष्य अधिनियम की धारा 9 के अन्र्तगत अभियुक्त की पहचान स्थापित करने का एक तरीका शिनाख्त परेड है । इसका साक्ष्य धारा 9 के अधीन ग्राह हैं ।

CONSTITUTION संविधान के अनुच्छेद 356 के अन्र्तगत राष्ट्रपति शासन किसी राज्य में छ: माह के लिए वैद्य रहता हैं ।

IPC 1860 मेंसरिया से तात्पर्य अपराध भावना या दुराशय या आपराधिक मनःस्थिति है ।

IPC 1860 समान्य आशय का सिद्धान्त लागु होने के लिए कम से कम दो व्यक्ति लिप्त होने चाहिए—धारा 34

लीगल बज़्ज़ पाठशाला 🈴

SUBSCRIBE LEGAL BUZZ UPDATES VIE EMAIL

Enter your email address to subscribe to this website update and receive notifications of new posts by email.

Join 1,542 other subscribers

OLD ONLINE MOCK TESTS

LEGALBUZZ WHATSAPP GROUP जाइन करने के​ लिए "JOIN NAME CITY" लिखकर PIYUSHV05@GMAIL.COM मेल करे
WWW.KRKAWCLASSESKOTA.COM
FOR OUR CLASSES CONTACT US- WWW.KRLAWCLASSESKOTA.COM RP-SHARMA SIR 📞 91-97998-59402

ONLINE VISITOR

Visitors online – 0:
users –
guests –
bots –
The maximum number of visits was – 2019-04-20:
all visitors – 8074:
users – 3642
guests – 4395
bots – 37

  • 35,546 hits